उत्तराखंड में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्य आर्थिक रूप से मजबूत नहीं है। इसलिए उत्तराखंड सहित आपदा प्रभावित राज्यों को कुछ विशेष वस्तुओं पर सेस लगाने का अधिकार मिलना चाहिए, ताकि आपदा कोष की स्थापना की जा सके। यह बात रविवार को जीएसटी मंत्री समूह की दिल्ली में आयोजित बैठक में वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने उठाई। वित्त मंत्री पंत ने कहा कि आपदा से हजारों करोड़ का नुकसान होता है।
वित्त मंत्री पंत ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय प्रभावित क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को जबर्दस्त नुकसान होता है। ऐसे में प्रभावित राज्य को वित्तीय संस्थाओं से कर्ज की तय सीमा में छूट मिलनी चाहिए। यह छूट मिलने से आपदा प्रभावित राज्य में राहत व पुनर्वास कार्यों को गति देनेे में विशेष सुविधा मिलेगी। वहीं आपदाग्रस्त राज्य विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक व अन्य वित्तीय संस्थाओं से जरूरत के अनुसार तय सीमा से अधिक कर्ज ले सकेगा। बैठक में आपदा के दौरान एनडीआरएफ को मिलने वाली केंद्रीय मदद के मानकों में भी संशोधन का मुद्दा उठा।
उन्होंने कहा कि आपदा से होने वाले भारी भरकम नुकसान की तुलना में पुनर्वास कार्यों के लिए मिलने वाली धनराशि संतोषजनक नहीं है। लिहाजा इन मानकों में संशोधन होना चाहिए। आपदाग्रस्त राज्य में धन संग्रह के विभिन्न उपायों पर भी राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। नार्थ ब्लाक में आयोजित बैठक में आपदा प्रभावित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने ‘रेवेन्यू मोबलाइजेशन इन केस आफ नेचुरल क्लेमिटीज एंड डिजास्टर’ विषय पर अपना पक्ष रखा। बैठक की अध्यक्षता बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने की। राज्यों के प्रतिनिधियों के सुझाव पर जीएसटी मंत्री परिषद ने सहानुभूति पूर्वक विचार करने का भरोसा दिया।
बैठक में उठे प्रमुख मुद्दे
- सेस से आपदा कोष की स्थापना
- एनडीआरएफ के मानकों में संशोधन
- कर्ज की तय सीमा में छूट मिले