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अमर उजाला संवाद: गोल्ड मेडलिस्ट का ऐसा रूप देखा कि पसीजा 'मुक्केबाज' के राइटर का दिल

Mon, 08 Jan 2018 02:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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amar ujala samwad
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संवाद के दूसरे सेशन में फिल्म मुक्केबाज की टीम लोगों से रूबरू हुई। कार्यक्रम में बॉक्सर अखिल कुमार, अभिनेता जिमी शेरगिल, जोया हुसैनऔर स्टोरी राइटर मुक्केबाज विनीत कुमार सिंह गांव कस्बों का हिंदुस्तान मुद्दे पर चर्चा की।

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जिसमें बॉक्सर अखिल कुमार ने कहा कि उत्तराखंड से कई अच्छे मुक्केबाज निकले हैं, राज्य में सुविधाओं की कमी है। अखिल ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि राज्य में इन्फ्रास्ट्रेक्चर सुधरेगा। खेलने कूदने से आप लाजवाब बनेंगे। खिलाड़ियों पर फिल्म बनने से खेल को प्रोत्साहन मिलता है।

वहीं राइटर विनीत कुमार ने कहा कि मैंने देखा है कई खिलाड़ी है जो अच्छे हैं, लेकिन उन्हें सही प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता है। कहा कि बनारस रेलवे स्टेशन पर मैंने गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को देखा जो एक गार्ड का बक्शा लेकर जा रहा था। वह लोगों से अपना चेहरा छिपा रहा था। उस दिन अहसास हुआ कि इनकी लाइफ को पर्दे पर उतारा जाए। 
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सेशन के दौरान जिंदगी लाइव फेम ऋचा अनिरुद्ध ने अभिनेता जिमी शेरगिल से कुछ सवाल पूछे। ऋचा ने पूछा कि क्या मुक्केबाज में जिमी स्पोर्ट्स की बुराईयों को रिप्रेजेंट कर रहे हैं। इस जिमी ने कहा कि हीरो है तो विलन भी होगा। बुरी चीजें होंगी तभी अच्छी चीजें सामने आएंगी। जिमी ने कहा कि स्पोर्ट्स को पॉलिटिक्स से आगे ले जाना होगा।

फिल्म अभिनेत्री जोया ने कहा कि इस फिल्म के माध्यम से दिखाया जा रहा है कि अगर लड़कियों को मौका दिया जाए तो वह भी आगे बढ़ सकती हैं। जोया ने कहां कि उत्तराखंड में दूसरे राज्य के मुकाबले इंफ्रास्टक्चर की कमी है। लेकिन फिर भी यहां से अच्छे खिलाड़ी निकले हैं।

इस दौरान अभिनव थापा ने प्रश्न किया कि फिल्म की शूटिंग से राज्य के पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, लेकिन राज्य की कोई फिल्म नीति नहीं है। इससे क्या होगा। इस पर जिमी शेरगिल ने कहा कि अगर राज्य में सड़कें बन जाएं तो सब होगा। कहां कि मैं पंजाब से हूं, लेकिन फिर भी उत्तराखंड में ज्यादा आता हूं। यहां सड़कें ठीक नहीं हैं, इसलिए सबको परेशानी होती है।

अचानक जरूरी काम से मुंबई जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने रिकार्डेड मैसेज के साथ देहरादून से अपने पुराना नाता, लगाव और कार्यक्रम में शिरकत न होने का मलाल जाताया। उन्होंने बताया कि उनकी छठवीं कक्षा तक पढ़ाई दून के हिलग्रेंज स्कूल से हुई है। वह स्कूल में जाकर पुराने दिनों को याद करना चाहते थे, लेकिन मजबूरी में जाना पड़ रहा है।

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