उन्होंने किसानों से घेराव की रणनीति बनाने का आह्वान किया। अधिवेशन में अतर सिंह संधु, ललित त्यागी, अनिल चौधरी, पहल सिंह पंवार, राजदीप मैनवाल, सागर सिंह, चौधरी विपिन, गंगा प्रसाद यादव, नीरज चौधरी, लाल बहादुर यादव, पुष्पा धनगड़, गुरनाम सिंह, सुरेश कोथ, कंवरपाल चौधरी, राहुल गुर्जर, मदन, यशपाल प्रधान, अजीत सिंह कहलोम, जग्गी पहलवान, शमशेर सिंह दहिया, रुपेेश शुक्ला, कोमल रानी आदि मौजूद रहे।
यूनियन के नाम पर कर रहे उगाही
ऋषिपाल अंबावत ने कहा कि भाकियू 20 सालों से किसानों के हितों के लिए संघर्ष कर रही है। इस अवधि में कई संगठनों ने अलग होकर अपनी दुकान भी चलानी शुरू कर दी है। यूनियन के नाम से टोपी बिल्ला लगाकर लोगों को लूटने का काम कर रहे हैं, जिसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने लोगों को ऐसेे व्यक्तियों के प्रलोभन में न आने की बात कही। कहा कि गंगा स्नान के नाम पर लूट खसोट नहीं होनी चाहिए।
आरके त्यागी को यूनियन से बाहर किया
रुड़की निवासी एवं यूनियन के प्रवक्ता आरके त्यागी को भाकियू से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। राष्ट्रीय प्रवक्ता अतर सिंह संधु ने बताया कि यूनियन में इनका कोई योगदान नहीं रहा। वह यूनियन के नाम पर चोर बाजारी कर रहे थे। त्यागी परिवार के अवैध तरीके से खनन आदि के कामों में लिप्त होने से यूनियन की बदनामी हो रही थी। उन्होंने अन्य लोगों को भी आगाह किया कि यदि किसी ने यूनियन के नाम का दुरुपयोग किया तो उसे बाहर कर दिया जाएगा।