तीन दिन पूर्व बैंक से मिले नोटिस से परेशान किसान की हृदयघात से मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस व प्रशासन को सूचना दिए बिना ही किसान का अंतिम संस्कार कर दिया।
कर्ज से परेशान किसान की मौत की सूचना से क्षेत्र के काश्तकारों में आक्रोश व्याप्त है। हालांकि प्रशासन ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच बैठा दी है। डीएम ने स्पष्ट कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा, उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम बिरिया भूड़ थाना नानकमत्ता निवासी मस्सा सिंह (70) पुत्र गुरमेज सिंह की सोमवार की शाम अचानक मौत हो गई। मृतक अविवाहित था और अपने बड़े भाई स्व. रघुवीर सिंह के परिवार के साथ रहता था। मृतक के भतीजे जगजीत सिंह और सर्वजीत सिंह ने बताया उनके चाचा के नाम चार एकड़ जमीन है।
उन्होंने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक सितारगंज से वर्ष-2015 में ट्राली के लिए 2.25 लाख का ऋण लिया था। इसी बैंक से वर्ष 2013 में कृषि कार्य के लिए तीन लाख का कर्ज लिया। बताया कि एक जुलाई को बैंक द्वारा जारी नोटिस में ट्राली के बकाया ऋण को जमा करने की हिदायत दी गई। नोटिस मिलते ही वह अत्यधिक परेशान हो गए और तीन जुलाई को हृदयघात से उनकी मौत हो गई।
स्वामी नारायण आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग की
बुजुर्ग किसान की मौत
किसान की मौत से क्षेत्र में रोष व्याप्त है। अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह ने मृतक के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी। कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान कर्ज में डूबता जा रहा है। सरकार फसल का उचित मूल्य नहीं दे रही है और दो-दो साल की गन्ना पेमेंट बकाया है। उन्होंने सरकार से स्वामी नारायण आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग की।
तहसीलदार करेंगे किसान की मौत की जांच
किसान की मौत की सूचना पर सितारगंज के प्रभारी एसडीएम विजय नाथ शुक्ला, सीओ खटीमा बीएल मद्यवाल ने थाने पहुंचकर घटना की जानकारी ली। एसडीएम ने बताया कि मृतक किसान ने 29 जून को ही बैंक में 18 हजार रुपये जमा कर खाते को दुरुस्त कराया था। बैंक का नोटिस मिलने से मौत के कारणों की जांच कराई जाएगी। इसके लिए तहसीलदार शेर सिंह ग्वाल को जांच सौंपी गई है।
मृतक और उनके भतीजों के संयुक्त खाते पर दिया लोन सही चल रहा था। ट्राली पर दिए लोन की किस्त पिछले छह माह से जमा न करने से 18 हजार रुपये बकाया चल रही थी, जिसे मौखिक कहने के साथ ही 20 जून को किस्त जमा करने का नोटिस जारी किया गया। नोटिस जारी होने के बाद 29 जून को मृतक द्वारा बकाया 18 हजार की किस्त भी जमा कर दी गई। इसके बाद बैंक का किसान पर कोई दबाव नहीं था।
- एनके मंडल, प्रबंधक, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, सितारगंज
नोटिस मिलने के कई दिन बाद किसान की मौत हुई। इस पर परिजनों ने पुलिस या प्रशासन को सूचित किए बिना दाह संस्कार कर दिया। ऐसे में पूरा मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। तहसीलदार शोर सिंह ग्वाल को इसकी जांच सौंपी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा, उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई साजिश हुई है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
- डा. नीरज खैरवाल, डीएम, ऊधमसिंह नगर