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कृषि कानून: भाजपा ने उत्तराखंड सरकार और संगठन के 18 नेताओं को मैदान पर उतारा 

Sun, 13 Dec 2020 11:03 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • कानून के समर्थन में भगत, निशंक, कौशिक, हरक, पांडेय व धनसिंह समेत 18 नेताओं की होंगी पत्रकार वार्ताएं
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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कृषि कानूनों को लेकर गरमाई सियासत के बीच भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों को मैदान में उतार दिया है। रविवार से तीन दिन तक पार्टी के केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, हरक सिंह रावत, अरविंद पांडेय समेत पार्टी के 18 नेता प्रदेश में अलग अलग स्थानों पर पत्रकार वार्ताओं में कृषि कानूनों के समर्थन में अपना पक्ष रखेंगे। 

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इसकी शुरुआत हल्द्वानी प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत और देहरादून से कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक तथा चमोली से राज्यमंत्री धनसिंह रावत ने प्रेस वार्ताओं से कर दी है। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान कल्याण व उनकी आय में वृद्धि के लिए लोकसभा में पारित किए गए कृषि विधेयकों के व्यापक प्रचार व जनजागरण के लिए हर जिले में पत्रकार वार्ता के निर्देश दिए हैं। 

किस जिले में कौन करेगा पत्रकार वार्ता
14 दिसंबर को: टिहरी और रुद्रप्रयाग में राज्यमंत्री धनसिंह रावत, उत्तरकाशी में प्रदेश प्रवक्ता विनोद सुयाल, ऋषिकेश में प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल, विकासनगर में प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला,  रुड़की में दर्जाधारी विनय रुहेला, अल्मोड़ा में प्रदेश प्रवक्ता प्रकाश रावत, चंपावत में दर्जाधारी सुदेश परिहार पत्रकार वार्ता करेंगे।
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15 दिसंबर को:  हरिद्वार में केंद्रीय शिक्षा मंत्री व सांसद रमेश पोखरियाल निशंक,  कोटद्वार में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, ऊधमसिंह नगर में कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय, पौड़ी में दायित्वधारी वीरेंद्र सिंह बिष्ट, पिथौरागढ़ में दर्जाधारी गजराज बिष्ट, बागेश्वर में दायित्वधारी केदार जोशी, नैनीताल में बलराज पासी प्रेस कांफ्रेंस करेंगे।

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किसानों को बरगला रहे हैं विरोधी दल : कौशिक

शहरी विकास मंत्री और शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक कृषि कानूनों को लेकर उपजे विरोध को सियासी करार दिया है। कौशिक ने कहा कि प्रदेश के किसान आंदोलित नहीं है। फिर भी किसानों की समस्याओं को जानने और कृषि कानूनों को लेकर उपजे संशय का दूर करने के लिए मंत्रियों से लेकर विधायक तक सक्रिय होंगे। 

रविवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में सरकार की रणनीति का खुलासा करते हुए कौशिक ने कहा कि आने वाले समय में जिले से लेकर विकास खंड तक के स्तर पर किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। इन गोष्ठियों में मंत्रियों से लेकर विधायक और संगठन के पदाधिकारी तक शामिल होंगे। कृषि कानूनों पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी और किसानों की अन्य समस्याओं को जानकर उनका समाधान किया जाएगा। 

मंत्री के मुताबिक किसान विरोध पूरी तरह से सियासी है और केंद्र सरकार के खिलाफ साजिश के तहत किसानों को उकसाया जा रहा है। प्रदेश में किसान असंतुष्ट नहीं है और इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी शांति है। विपक्षी दल किसानों को बरगला रहे हैं। किसान पहले भी अपनी जमीन के मालिक थे,आज भी हैं और कल भी रहेंगे। 

कौशिक ने कहा कि कृषि कानूनों से न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य कहीं प्रभावित हो रहा है और न ही मंडिया खत्म होने जा रही हैं। इसके उलट, किसान को और अधिक आजादी मिल जाएगी। वह बिचौलियों और दलालों के चंगुल से मुक्त होगा। अन्नदाता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह कृषि कानून लाए गए हैं। मंत्री के मुताबिक 2013-14 की तुलना में 2019-20 के केंद्रीय बजट में छह गुना वृद्धि हुई।

10.60 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना का लाभ मिला। प्रदेश में भी त्रिवेंद्र रावत की सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान कर रही है। शून्य ब्याज दर पर किसानों को ऋण दिया जा रहा है। जैविक खेती और अन्य माध्यमों से किसानों की आय दोगुनी करने की कोशिश जारी है। वार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष डा. देवेंद्र भसीन, प्रदेश कार्यालय सचिव कौशुतानंद जोशी, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान सहित अन्य उपस्थित थे।
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कृषि बजट बढ़ा, एमएसपी बढ़ी, फिर भी दुष्प्रचार कर रहे विरोधी: भगत

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कृषि बिल को लाने का वादा किया था। मोदी सरकार ने बिल को पारित कराने के बाद उसे लागू कर दिया तो कांग्रेस विरोध पर उतर आई।  विरोध के बाद अब जनता के समक्ष कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि कृषि बजट बढ़ा, एमएसपी बढ़ी, फिर भी विरोधी दुष्प्रचार कर रहे हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बातचीत में कहा कि कांग्रेस किसानों के साथ बराबर छल करती रही है। कांग्रेस कभी भी किसानों की हितैषी नहीं रही है। प्रधानमंत्री के लिए किसानों का हित सर्वोपरि है। 2022 तक नया कृषि कानून किसानों की आमदनी दोगुना करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विरोध करने के लिए विपक्षी दल राजनीति कर रहे हैं।

कांग्रेस और उनके सहयोगियों की करतूत का पर्दाफाश भी हुआ है। कांग्रेस नहीं चाहती है कि किसानों का फायदा हो, क्योंकि कांग्रेस और उसका साथ दे रहे विभिन्न दलों के बड़े-बड़े नेता दशकों से किसानों का शोषण करते रहे हैं। इनमें कुछ विरोधी बिचौलिए का काम करते हैं।

विरोधियों का एक धड़ा अपने व्यवसायिक हितों को बचाने के लिए विरोध कर रहा है। भगत ने कहा कि  मोदी सरकार छह वर्षों से किसानों के हित में बड़े बड़े कदम उठा रही है। 2013-14 में कृषि विभाग का बजट था छह वर्षों में दो गुना बढ़ गया है। अब बजट 134,399 करोड़ रुपये हो गया है। केंद्र सरकार ने एमएसपी भी बढ़ा दिया है। इधर विरोधी दल दुष्प्रचार कर रहे है कि मंडी और एमएसपी समाप्त की जा रही है।
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