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कृषि कानून: भारतीय किसान यूनियन रोड ने किया राजधानी देहरादून के दो प्रवेश द्वार बंद करने का ऐलान

Wed, 16 Dec 2020 11:15 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
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- फोटो : फाइल फोटो
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भारतीय किसान यूनियन रोड की ओर से रुड़की में पंचायत का आयोजन कर किसान आंदोलन को तेज करने के लिए रणनीति तैयार की गई। प्रदेश अध्यक्ष चौधरी पदम सिंह के अध्यक्षता में आयोजित पंचायत में निर्णय लिया गया कि जल्द ही कृषि कानूनों के विरोध में राजधानी देहरादून के दो प्रवेश द्वारों को भारतीय किसान यूनियन रोड के कार्यकर्ता बंद करेंगे। कानूनों के विरोध में प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा। 

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यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष पदम रोड़ ने बताया कि देहरादून में होने वाले प्रदेश सरकार के खिलाफ विशाल प्रदर्शन व प्रवेश द्वारों के बंद किया जाएगा। इसके लिए 20 दिसंबर को होने वाली बैठक में आंदोलन की तारीख घोषित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार ने किसानों का उत्पीड़न करने का जो कार्य किया है, उसे किसान किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगा।


किसान पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार को बार-बार किसानों की समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन सरकार किसानों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। इस दौरान इकबालपुर शुगर मिल पर बकाया करोड़ों के गन्ने भुगतान के मुद्दे पर भी किसानों ने रोष प्रकट किया। इसके अलावा किसानों ने कहा कि बिजली विभाग की ओर से किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
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इसके खिलाफ भी अब उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष पद पर मुबारक अली व रुड़की तहसील अध्यक्ष पद पर शौकत अली को मनोनीत किया गया। किसानों ने गन्ने के मूल्य तय न होने पर भी गहरा रोष प्रकट किया। पंचायत में  जिला अध्यक्ष नाजिम अली, युवा जिला अध्यक्ष संजीव कुशवाहा, वरिष्ठ किसान नेता फखरे आलम, प्रदीप त्यागी, राजपाल मुंशी, सीताराम, टीटू, शोभाराम, परवेज आलम, रवि प्रकाश, गालिब, रोबिन गोस्वामी, रियाजुल हसन, मेहरबान अली, रिजवान, परविंदर चौधरी आदि मौजूद रहे।

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कृषि कानून वापस नहीं लिए तो भुगताना होगा गंभीर परिणाम

भारतीय किसान यूनियन तोमर के प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है। वहीं कृषि मंत्री से कृषि कानूनों को वापस कराने की मांग की है। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में हरिद्वार जनपद के भी किसान मौजूद रहे।

बुधवार को प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून में कृषि मंत्री से मुलाकात करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने जिन कृषि कानूनों को लागू किया है, उनमें काफी खामियां हैं। इसके चलते इन कृषि कानूनों को वापस किया जाए। उन्होंने बताया कि इन कृषि कानूनों के आधार पर किसान कोर्ट भी नहीं जा सकते हैं, इसके साथ ही पदाधिकारियों ने देहरादून स्थित शिमला बाईपास पर चौधरी चरण सिंह की मूर्ति स्थापित कराने की भी मांग की है।

प्रतिनिधिमंडल ने साफ किया है कि यदि डबल इंजन की सरकार किसानों के हित में फैसले नहीं लेती है तो सरकार को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ेगा। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष सोमदत्त शर्मा, उपाध्यक्ष संजीव मलिक, प्रदेश संगठन मंत्री चमन सिंह संरक्षक सुशील मलिक, हरिद्वार जिला अध्यक्ष विकेश चौधरी, रमेश चौहान, नरेंद्र चौहान आदि मौजूद रहे।
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