नकली रेमडेसिविर का मामला पकड़ में आने के बाद ड्रग विभाग कई तरह के इनपुट पर काम कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े लोग भूमिगत हो गए हैं। जांच एजेंसियों की टीम नकली दवाओं का धंधा करते आ रहे लोगों की गतिविधियों पर निगाह रख रही है। माना जा रहा है आने वाले दिनों में कई बड़ी मछलियों को भी गिरफ्त में लिया जाएगा।
नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन रैकेट के भंडाफोड़ से हरिद्वार जिला शर्मसार हुआ था। इसके तार रुड़की और आसपास क्षेत्रों से भी जुड़े हैं। हालांकि, यह क्षेत्र पहले भी बड़े पैमाने पर नकली दवाओं का निर्माण कर मरीजों की जान से खेलने के लिए बदनाम रहा है। पूर्व में ड्रग विभाग और पुलिस नकली दवा बनाने के दर्जनों मामलों का खुलासा कर चुकी है, लेकिन कोरोना काल में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के धंधे ने मानवता को ही शर्मसार कर दिया है।
अब ड्रग विभाग कोरोना के लिए जरूरी सभी एंटीबायोटिक दवाओं की पड़ताल में जुटी है। बताया जा रहा है कि नकली रेमडेसिविर बेचने के आरोपियों के साथ इस पूरे नेटवर्क में जुड़े दर्जनों लोगों को ट्रेस किया जा रहा है। सातों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कई और लोगों के नेटवर्क में शामिल होने की जानकारी मिली है। सूत्रों के अनुसार, हरिद्वार के ही चार से पांच और लोगों के इस नेटवर्क में शामिल होने की बात सामने आई है।
पुलिस इन लोगों के विषय में सभी जरूरी जानकारी जुटा रही है। वहीं, नेटवर्क के तार अन्य प्रदेशों से जुड़े होने की संभावना पर पुलिस टीम की जांच आगे बढ़ रही है। हो सकता है कि आरोपी हरिद्वार या रुड़की में किसी फैक्टरी में इंजेक्शन की लेबलिंग कर रहे थे। मुख्य आरोपी के पास से रुड़की की 2019 से बंद पड़ी फैक्टरी का हारमोन सैंपल भी मिला था।
ऐसे में संभावना इस बात कि भी कि रेमडेसिविर के अलावा कई और नकली दवाओं का निर्माण किया जा रहा था। इन तमाम पहलुओं पर पुलिस जांच चल रही है। ड्रग इंस्पेक्टर मानवेंद्र सिंह राणा ने बताया कि नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द अन्य लोगों को भी पकड़ा जाएगा।