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नकली रेमडेसिविर का मामला : दवा फैक्टरी के मालिक ने दिल्ली क्राइम ब्रांच की कार्यशैली पर उठाए सवाल

Sun, 02 May 2021 10:04 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार

सार

 सिडकुल की दवा फैक्ट्री नेक्टर हर्ब एंड ड्रग्स के मालिक विशद कुमार की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई है, जिसमें दिल्ली क्राइम ब्रांच की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके द्वारा ले जाई गई सीसीटीवी की फुटेज की डीबीआर को सुरक्षित रखवाने की मांग की गई है।
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छापे के मामले के नया मोड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने और बेचने के मामले में शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के छापे के मामले के नया मोड़ आ गया है। सिडकुल की दवा फैक्टरी नेक्टर हर्ब एंड ड्रग्स के मालिक विशद कुमार की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई है, जिसमें दिल्ली क्राइम ब्रांच की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके द्वारा ले जाई गई सीसीटीवी की फुटेज की डीबीआर को सुरक्षित रखवाने की मांग की गई है। 

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रेमडेसिविर की कालाबाजारी : जेल से रिहा हुए कुछ लोग ड्रग विभाग के रडार पर, नकली रेमडेसिविर के धंधे में शामिल होने की आशंका

फैक्टरी नेक्टर हर्ब एंड ड्रग्स के मालिक विशद कुमार ने कलालघाटी पुलिस चौकी में दी गई तहरीर में कहा कि उनकी फैक्टरी की तो वीडियो और तस्वीर को राष्ट्रीय चैनलों में चलवाया गया। दिल्ली पुलिस ने उनसे व्हाट्स एप पर मंगवाएं थे। कहा कि उनकी फैक्टरी का उक्त नकली इंजेक्शनों से कोई लेना देना नहीं है।
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रेमडेसिविर: हरिद्वार में कोरोना संक्रमितों को बांटी जा रही थी 'मौत', जिम्मेदार थे बेखबर

यह बात वह उत्तराखंड पुलिस को भी अपने बयानों में बता चुके हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस न जाने क्यों उक्त इंजेक्शनों की बरामदगी जबरन कोटद्वार उनकी फैक्टरी से जोड़ना चाहती है। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उनकी कंपनी की छवि धूमिल हुई है। बताया कि उत्तराखंड पुलिस द्वारा जांच के लिए ले गए सीसीटीवी फुटेज की डीबीआर भी दिल्ली पुलिस अपने साथ ले गई है।

उसे न तो सील किया गया है और न ही उसे कापी ही करने दिया गया। ऐसे में उसमें छेड़छाड़ किए जाने की आशंका है। फैक्टरी मालिक ने बताया कि नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में दिल्ली पुलिस की हिरासत में चल रहे आदित्य गौतम ने उनकी फैक्टरी मई, 2021 तक लीज पर ली थी। जिसे वह छह महीने पहले ही छोड़कर जा चुका था। कलालघाटी चौकी इंचार्ज एसआई कमलेश शर्मा ने तहरीर मिलने की पुष्टि की है। बताया कि मामले की पड़ताल की जा रही है। 

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रेमडेसिविर के राक्षसी नेटवर्क को तोड़ने में जुटीं जांच एजेंसियां

नकली रेमडेसिविर का मामला पकड़ में आने के बाद ड्रग विभाग कई तरह के इनपुट पर काम कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े लोग भूमिगत हो गए हैं। जांच एजेंसियों की टीम नकली दवाओं का धंधा करते आ रहे लोगों की गतिविधियों पर निगाह रख रही है। माना जा रहा है आने वाले दिनों में कई बड़ी मछलियों को भी गिरफ्त में लिया जाएगा।

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन रैकेट के भंडाफोड़ से हरिद्वार जिला शर्मसार हुआ था। इसके तार रुड़की और आसपास क्षेत्रों से भी जुड़े हैं। हालांकि, यह क्षेत्र पहले भी बड़े पैमाने पर नकली दवाओं का निर्माण कर मरीजों की जान से खेलने के लिए बदनाम रहा है। पूर्व में ड्रग विभाग और पुलिस नकली दवा बनाने के दर्जनों मामलों का खुलासा कर चुकी है, लेकिन कोरोना काल में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के धंधे ने मानवता को ही शर्मसार कर दिया है।

अब ड्रग विभाग कोरोना के लिए जरूरी सभी एंटीबायोटिक दवाओं की पड़ताल में जुटी है। बताया जा रहा है कि नकली रेमडेसिविर बेचने के आरोपियों के साथ इस पूरे नेटवर्क में जुड़े दर्जनों लोगों को ट्रेस किया जा रहा है। सातों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कई और लोगों के नेटवर्क में शामिल होने की जानकारी मिली है। सूत्रों के अनुसार, हरिद्वार के ही चार से पांच और लोगों के इस नेटवर्क में शामिल होने की बात सामने आई है।

पुलिस इन लोगों के विषय में सभी जरूरी जानकारी जुटा रही है। वहीं, नेटवर्क के तार अन्य प्रदेशों से जुड़े होने की संभावना पर पुलिस टीम की जांच आगे बढ़ रही है। हो सकता है कि आरोपी हरिद्वार या रुड़की में किसी फैक्टरी में इंजेक्शन की लेबलिंग कर रहे थे। मुख्य आरोपी के पास से रुड़की की 2019 से बंद पड़ी फैक्टरी का हारमोन सैंपल भी मिला था।

ऐसे में संभावना इस बात कि भी कि रेमडेसिविर के अलावा कई और नकली दवाओं का निर्माण किया जा रहा था। इन तमाम पहलुओं पर पुलिस जांच चल रही है। ड्रग इंस्पेक्टर मानवेंद्र सिंह राणा ने बताया कि नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द अन्य लोगों को भी पकड़ा जाएगा।
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