फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun News: नकली दवाओं के सौदागर ने उगले राज, बंद फैक्टरी में बनती थीं दवाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
I
विज्ञापन

IIरुड़की में भारी मात्रा में कई दवाओं के सॉल्ट पकड़े, गैंग के कई और सदस्यों को लिया राडार पर
I

I
I
Iनकली दवाओं के सौदागर नवीन बंसल ने एसटीएफ के सामने कई राज उगले हैं। इस क्रम में एसटीएफ दवा नियंत्रक विभाग के साथ मिलकर रुड़की और सहसपुर में छापा मार चुकी है। रुड़की से दवाओं के कई क्विंटल सॉल्ट बरामद किए गए हैं।
I
I
I
Iगैंग के कुछ और सदस्य एसटीएफ के राडार पर आए हैं। एसटीएफ की टीम ने कई जगह दबिश देना शुरू कर दिया है। ये लोग बंद फैक्टरी में दवाएं बनाते हैं। एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया कि एक जून को संतोष कुमार नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से नामी कंपनियों के रैपर, क्यूआर कोड व बॉक्स आदि बरामद हुए थे। उससे पूछताछ हुई तो पता चला कि इनका प्रयोग नकली दवाओं को असली बताकर बेचने के लिए किया जाता है। इस काम को लंबे समय से राजस्थान का अक्षय कर रहा है। जांच में अक्षय का असल नाम नवीन बंसल पता चला।
विज्ञापन

I
Iपुलिस ने गत 27 जून को नवीन बंसल को भी राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया। नवीन ने एसटीएफ को बताया कि वह सहसपुर की डॉ. मित्तल लेबोरेटरी से नकली दवाएं बनवाता है। इसके अलावा रुड़की के नरेश और लोकेश गुलाटी के माध्यम से भी वह दवाएं बनवाकर उन्हें अलग-अलग बाजारों में बेचता है। इस पर रुड़की से इंस्पेक्टर यशपाल सिंह बिष्ट की टीम ने 263 किलोग्राम पैरासिटामोल सॉल्ट और 400 किलोग्राम पैरासिटामोल की गोलियां बरामद कीं। यहां से लोकेश गुलाटी, नरेश और मोहतरम अली को गिरफ्तार किया गया।
I
I
I
Iइनके कब्जे से भी भारी मात्रा में दवाएं बरामद हुईं। एसएसपी ने बताया कि सहसपुर की डॉ. मित्तल लेबोरेटरी बंद पड़ी है। ये लोग बंद फैक्टरी में ही दवाएं तैयार कराते हैं। नवीन बंसल से कई और लोगों के बारे में पता चला है। इनकी भी जांच की जा रही है। जल्द ही इस गिरोह के कुछ और सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
विज्ञापन

I
I
I
Iबड़े पैमाने पर चल रहा नकली दवाओं का धंधा
I

Iप्रदेश में नकली दवाओं का यह मामला नया नहीं है। इससे पहले भी सेलाकुई और रुड़की क्षेत्र से दर्जनों बंद फैक्टरी पकड़ी गई हैं। वर्ष 2021 में एसटीएफ ने ही रुड़की और मंगलौर क्षेत्र से पांच जगहों पर छापा मारा था। इसके बाद से स्थानीय पुलिस ने भी लगातार कार्रवाई की, लेकिन अब तक इस धंधे की जड़ को खत्म करने की ओर बड़ा कदम नहीं उठाया गया है। ज्यादातर नकली दवाएं उन फैक्टरियों में बन रही हैं, जो पहले बंद हो चुकी हैं। बंद फैक्टरियों की लगातार निगरानी न होने के कारण ये इस धंधे में लिप्त हैं।I
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें