मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में छह माह से रह रही फर्जी महिला आईएएस गुरुवार को नए खुलासा किया।
खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाली रूबी चौधरी ने मीडिया को बताया कि उसके किसी रिश्तेदार ने एकेडमी में लाइब्रेरियन की नौकरी दिलाने के लिए 20 लाख रुपए की मांग की थी। जिसमें से वह पांच लाख रुपए दे चुकी है। इसलिए ही रूबी एकेडमी में रह रही थी।
रूबी ने बताया कि इस बारे में संस्थान के डायरेक्ट, डिप्टी डायरेक्टर से लेकर कई अधिकारियों को पता था। डायरेक्टर ने ही उसे एंट्री कार्ड उपलब्ध करवाया था। वह कोई जासूस नहीं है और न ही कोई अपराधी है। वह दो दिन से एसपी सिटी के संपर्क में है। रूबी ने कहा कि यदी वह अपराधी होती तो कब की फरार हो गई होती।
रूबी ने मीडिया के जरिए मांग की कि इस मामले में जो भी दोषी हैं उन्हें सजा दी जाए। रूबी ने कहा कि अगर मैं दोषी हूं तो मुझे भी दंड मिलना चाहिए। उधर, मामले की जानकारी मिलने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि दोषियों को सजा दी जाएगी।