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'महिला जासूस' ने IAS एकेडमी के खोले राज

Thu, 02 Apr 2015 06:33 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, देहरादून
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मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में छह माह से रह रही फर्जी महिला आईएएस गुरुवार को नए खुलासा किया।
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खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाली रूबी चौधरी ने मीडिया को बताया कि उसके किसी रिश्तेदार ने एकेडमी में लाइब्रेरियन की नौकरी दिलाने के लिए 20 लाख रुपए की मांग की थी। जिसमें से वह पांच लाख रुपए दे चुकी है। इसलिए ही रूबी एकेडमी में रह रही थी।

रूबी ने बताया कि इस बारे में संस्थान के डायरेक्ट, डिप्टी डायरेक्टर से लेकर कई अधिकारियों को पता था। डायरेक्टर ने ही उसे एंट्री कार्ड उपलब्ध करवाया था। वह कोई जासूस नहीं है और न ही कोई अपराधी है। वह दो दिन से एसपी सिटी के संपर्क में है। रूबी ने कहा कि यदी वह अपराधी होती तो कब की फरार हो गई होती।
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रूबी ने मीडिया के जरिए मांग की कि इस मामले में जो भी दोषी हैं उन्हें सजा दी जाए। रूबी ने कहा कि अगर मैं दोषी हूं तो मुझे भी दंड मिलना चाहिए। उधर, मामले की जानकारी मिलने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि दोषियों को सजा दी जाएगी।
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स्वयं को बताया था 2013 की बैच की अधिकारी

मुजफ्फरनगर की दो सगी बहनों ने आईपीएस बनकर जहां कुटबा गांव का नाम रोशन किया, वहीं रूबी चौधरी के फर्जी आईएएस बनने की करतूत से हर कोई हैरत में है।

करीब सात माह पहले रूबी ने खुद को 2013 बैच की आईएएस अधिकारी बताते हुए मीडिया को चयन का पत्र जारी किया था। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में फर्जी आईएएस बनकर रहने के मामले में उसका नाम आने से सवाल उठ रहा है कि उसने जालसाजी क्यों की?

मसूरी की प्रशासनिक अकादमी में फर्जी आईएएस बनकर छह माह तक रहने के बाद कानूनी जकड़न में आई रूबी चौधरी खुद को आईएएस अधिकारी घोषित कर चुकी है। चयन संबंधी पत्र के आधार पर कई समाचार पत्रों में उसका साक्षात्कार छपा था।

उस समय ग्रामीण काफी खुश हुए थे कि गांव की तीन बेटियां अफसर बन गईं। मध्य वर्गीय परिवार की रूबी की छवि बदरंग नहीं है। पिता खेती किसानी करते हैं, जबकि भाई प्राइवेट नौकरी।

रूबी के चार भाई-बहन बताए जा रहे हैं। बुधवार को रूबी के फर्जी आईएएस बनकर मसूरी में रहने का मामला खुला तो गांव के लोगों की जुबां पर एक ही सवाल था कि रूबी ने ऐसा क्यों किया?
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