पुलिस जांच में अभी तक सामने आए तथ्यों से साफ संकेत मिलता है कि रूबी चौधरी मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में रहकर आईएएस का प्रशिक्षण ले रही थी।
जानकार भी मानते हैं कि रूबी आईएएस का प्रशिक्षण ले रही थी और उसका लगभग आधा काम हो चुका था। ऐसे में सवाल उठता है कि आईएएस का प्रशिक्षण लेकर रूबी करती क्या? क्या उसे बतौर आईएएस कहीं तैनाती मिल जाती?
नियम-कायदों के जानकार बताते हैं कि ऐसा संभव भी था और नहीं भी। अकादमी से प्रशिक्षण के बाद रूबी को आईएएस का प्रमाणपत्र मिल जाता है। उसके बाद उस बैच में प्रशिक्षण लेने वालों को डीओपीटी से किसी प्रदेश का काडर एलाटमेंट किया जाता।
चूंकि रूबी के पास आईएएस के प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र होता, ऐसे में काडर की सूची में उसका नाम शामिल हो जाता और वह बतौर आईएएस ज्वाइन भी कर लेती। हालांकि इस प्रक्रिया में भी उसके पकड़े जाने की पूरी गुंजाइश होती।
लेकिन जानकार बताते हैं कि जो फर्जी तरीके से आईएएस का प्रशिक्षण हासिल कर सकता है वह अपनी ज्वाइनिंग भी करवा सकता है। एलबीएस अकादमी में छह माह तक रही रूबी चौधरी के मामले में अभी तक की जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि रूबी अकादमी में रहकर न केवल वहां के पुस्तकालय से 58 किताबें इश्यू कराईं, बल्कि राष्ट्रपति के साथ बतौर प्रशिक्षु ग्रुप फोटो भी खिंचवाए।