पूरे प्रदेश में एक ही इंस्टीट्यूट से इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का चयन होने से अधीनस्थ चयन आयोग को भी इंस्टीट्यूट पर संदेह हुआ। चयन आयोग ने जिलाधिकारी से इस इंस्टीट्यूट की जांच कराने के आदेश दिए गए।
बुधवार को दोपहर 12 बजे जिलाधिकारी दीपक रावत ने दल बल के साथ इंस्टीट्यूट में छापा मारा। इंस्टीट्यूट में छापा मारते ही कोचिंग सेंटर के छात्र भी माजरा समझ नहीं पाए। बाद में जिलाधिकारी ने इंस्टीट्यूट संचालक से भी पूछताछ की। इंस्टीट्यूट संचालक भी पूर्व में इंस्टीट्यूट से पास हुए छात्रों की जानकारी नहीं दे पाया।
इसके साथ ही जिलाधिकारी ने अलग-अलग ट्रेड में छात्रों से ली जा रही फीस की जानकारी मांगी तो, वह भी संचालक नहीं बता पाया। बाद में जिलाधिकारी ने इंस्टीट्यूट से एक रजिस्टर और मोबाइल कब्जे में लिए। इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल, एसपी देहात मणिकांत मिश्रा, सीओ स्वप्न किशोर सिंह, तहसीलदार मंजीत सिंह गिल और कोतवाल कमल कुमार लुठी समेत बड़ी समेत अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे
फेसबुक पर ज्यादा प्रचार पड़ा भारी
जीनियस एजुकेशन प्वाइंट कोचिंग सेंटर की ओर से अपने इंस्टीयूट से 66 छात्रों का सलेक्शन उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन और उत्तराखंड जल विद्युत निगम में होने का प्रचार किया जा रहा था, बताया जा रहा कि स्थानीय छोटे क्लासीफाइड में कोचिंग सेंटर के बारे में बढ़ा चढ़ा कर विज्ञापन आ रहे थे।
ऐसे विज्ञापन आने के बाद खुफिया विभाग ने भी इंस्टीट्यूट को लेकर रिपोर्ट तैयार की थी। फेसबुक पर चल रहे इस विज्ञापन को आधार मानकर उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग के सचिव संतोष बडोनी ने जिलाधिकारी हरिद्वार को कोचिंग सेंटर की वास्तविकता को लेकर जांच करने के आदेश दिए थे। जिस पर आज छापे की कार्रवाई की गई।