उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग परीक्षा के बाद परीक्षा नियंत्रकों ने जब ओएमआर शीट की स्कैनिंग की तो उसमें नौ अभ्यर्थियों के आवेदन के समय एक ही नाम के दो आवेदन पत्र भरे गए लेकिन उनमें फोटो अलग-अलग लगाया गया। इससे आवेदन के बाद उन्हें दो अलग-अलग प्रवेश पत्र प्राप्त हो गए।
परीक्षा में बैठे फर्जी छात्र ने ओएमआर शीट के बार कोड में शब्दों और अंकों में अपना अनुक्रमांक भरा लेकिन मशीन द्वारा पढ़े जाने वाले गोलों में दूसरा अनुक्रमांक मिला। इसके अतिरिक्त अन्य 12 आवेदकों की ओर से amroha@gmall.com के नाम से एक ही ई-मेल आवेदन में दर्शाया गया था, जिससे अनुमान लगाया गया कि किसी गिरोह ने इस पूरे रैकेट को संचालित किया है।
इसके अतिरिक्त एक छात्रा अभ्यर्थी का नंबर फर्जी तरीके से परीक्षा दे रहे छात्र द्वारा इस्तेमाल किया गया। इसमें छात्रा के धांधली किए जाने की पुष्टि न होने पर उसका परीक्षाफल आयोग ने घोषित किया, जबकि शेष 21 का परीक्षाफल रोका गया है।
पूरी परीक्षा में छात्रों ने हिंदी, व्यायाम, कला और विज्ञान विषय के प्रश्नों पर ओएमआर शीट भरी। छात्र यूएसनगर की विभिन्न तहसीलों के हैं, जिनके परीक्षा केंद्र भी जिले भर में ही बनाए गए थे। फर्जी छात्रों की ओएमआर शीट भी आयोग ने पुलिस प्रशासन को उपलब्ध कराई है। इसके आधार पर पुलिस प्रशासन आगे की जांच करेगा। माना जा रहा है कि जांच के बाद फर्जी छात्रों के साथ ही शिक्षा के नाम पर घोटाला करने वाले बड़े गिरोह का भी पर्दाफाश हो सकता है।