कार्निया प्रत्यारोपण के बाद कार्नियल अंधता से पीड़ित लोगों की आंखों में रोशनी लौटने से बहुत से नेत्र रोगियों में उम्मीद की किरण फूट पड़ी है। हिमालयन अस्पताल आकर रोगी अपनी आंखों की जांच करा रहे हैं। अस्पताल की आई बैंक प्रभारी डा. नीती गुप्ता का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा लोग नेत्रदान में सहयोग करें, जिससे कार्नियल अंधता पीड़ित लोगों की दुनिया रोशन हो सके।
डा. नीती गुप्ता का कहना है कि कार्नियल अंधता से पीड़ित मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। अधिकांश रोगियों को कार्निया प्रत्यारोपण से ठीक किया जा सकता है। लेकिन नेत्रदान के प्रति लोगों की जागरूकता कम होने के कारण मरीज अंधता का जीवन गुजार रहे हैं। पार्थिव शरीर से अगर छह घंटे के अंदर कार्निया मिल जाए तो मरीजों का भला हो जाएगा। जिनके कार्निया प्रत्यारोपण हुआ है वे अब खुशगवार जिंदगी गुजार रहे हैं।
पीड़ित लोग भी जागरूक हुए
अमर उजाला के अभियान के बाद हजारों की संख्या में लोगों ने नेत्रदान के लिए शपथ पत्र तो ली है। लेकिन कार्नियल अंधता से पीड़ित लोग भी जागरूक हुए हैं। मरीजों के परिजनों ने हिमालयन अस्पताल के नेत्र रोग विभाग से संपर्क करना शुरू कर दिया है। नीती गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में आकर मरीज अपनी आंखों की जांच भी करा रहे हैं। जैसे ही कार्निया मिलेगी, मरीजों के प्रत्यारोपित कर दी जाएगी।
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