सहसपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शंकरपुर-रामपुर में सील पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट होने से स्थानीय अधिसूचना इकाई (एलआईयू) का सिपाही बुरी तरह से घायल हो गया। उसके पैर और हाथ में गंभीर चोटें आई हैं। दून के एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। बम निरोधक दस्ते ने भी घटना स्थल का निरीक्षण कर मौके से विस्फोटक सामग्री के नमूने एकत्र किए, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। विस्फोट कैसे हुआ यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार एलआईयू को सूचना मिली थी कि सील फैक्ट्री से आसामाजिक तत्वों द्वारा विस्फोटकों की चोरी की जा रही है। जिस पर एलआइयू के एसआई अरविंद डंगवाल और सिपाही शादाब फैक्ट्री का निरीक्षण करने पहुंचे। बताया जा रहा है कि सिपाही शादाब किसी तरह फैक्ट्री के अंदर पहुंचे। अभी वह विस्फोटकों की जांच पड़ताल ही कर रहे थे कि अचानक तेज आवाज के साथ धमाका हो गया। इस धमाके की चपेट में आकर शादाबा बुरी तरह से घायल हो गया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग भी उधर दौड़े। आनन-फानन में सहसपुर पुलिस की मदद से घायल सिपाही शादाब को अस्पताल भिजवाया गया। बम निरोधक दस्ते के प्रभारी एसआई शशि पाल ने बताया कि फैक्ट्री में पटाखा बनाने वाले विस्फोटक मिले हैं। जिनकी सैंपलिंग की गई है। फिलहाल फैक्ट्री में पटाखा बनाने वाले स्लो एक्सपोल्सिव (कम क्षमता वाले विस्फोटक) मिले हैं। थाना प्रभारी प्रशिक्षु आईपीएस रेखा यादव ने बताया कि विस्फोट कैसे हुआ है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। मामले की जांच की जा रही है।
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बारूद के ढेर पर हजारों की आबादी
प्रदीप चौधरी
सहसपुर। जिस सील पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ, वहां पर अब भी भारी मात्रा में विस्फोटक मौजूद है। एक हल्की सी चिंगारी पूरे क्षेत्र को दहलाने के साथ ही एक बड़े हादसे की वजह बन सकती है, लेकिन यहां पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। कोई भी आसानी से दीवारों को फांद कर फैक्ट्री में दाखिल हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि यहां से लगातार विस्फोटकों की चोरी हो रही थी, जिस सूचना और जांच पर एलआईयू वहां पहुंची थी। फैक्ट्री के आसपास का इलाका रिहायशी है। आसपास हमेशा चहल-पहल बनी रहती है। फैक्ट्री को करीब दो साल पहले सील किया गया था। फैक्ट्री में अब भी गन पाउडर, सल्फर, पोटेशियम नाइट्रेट और चारकोल बड़ी मात्रा में मौजूद है। वर्तमान में फैक्ट्री खंडहर में तब्दील हो चुकी है। इसकी खपरेल की छत जगह जगह से टूटी है। दीवारें भी ज्यादा ऊंची नही हैं। एसएसआई कुलदीप पंत ने बताया कि अवैध फैक्ट्री संचालन को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया था। कोर्ट में मामला चल रहा है। बम निरोधक दस्ते की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट से अनुमति लेकर फैक्ट्री में रखे विस्फोटकों को डिस्पोज करने की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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माचिस बनाने की आड़ में चलती थी अवैध फैक्ट्री
विकासनगर। फैक्ट्री को माचिस बनाने के नाम पर किराए पर लिया गया था, लेकिन यहां अवैध तरीके से पटाखे बनाए जाने पर करीब दो साल पूर्व पुलिस प्रशासन द्वारा इसे सील कर दिया गया था। तब आसपास के लोगों को भी यही जानकारी थी कि यहां माचिस बनाई जाती है, तब भी एलआईयू के एसआई अरविंद डंगवाल और घायल हुए सिपाही शादाब ने इसका खुलासा किया था।
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रहस्य बना हुआ है विस्फोट
विकासनगर। विस्फोट कैसे हुआ यह अब भी रहस्य बना हुआ है। अब तक की जांच पड़ताल में विस्फोट के कारण स्पष्ट नही हो सके हैं। पुलिस भी इसकी जांच में जुटी है। बम निरोधक दस्ते का भी मनाना है कि बिना किसी चिंगारी के विस्फोट होना संभव नहीं है। ऐसे में इतना बड़ा धमाका जांच का विषय है।