सिंचाई विभाग ने पानी के बहाव का आकलन का काम अक्तूबर 2020 से शुरू कर दिया है। साल भर में पानी के बहाव की मात्रा के आधार पर तय किया जाएगा कि किस समय नदी में न्यूनतम पानी की कितनी मात्रा रहती है। ऐसे में नदी पर बैराज, बांध बनाने सहित अन्य मामलों में भी पानी का बहाव बनाकर रखना होगा।
भूजल का स्तर साल में दो बार मापा जाएगा
बोर्ड का स्पष्ट आदेश है कि इन नदियों के जल संग्रहण क्षेत्र में भूजल का स्तर साल में दो बार मापा जाए और उसे कम न होने दिया जाए। नदी में पानी की मात्रा इस बात पर भी निर्भर करती है कि भूजल का दोहन किस स्तर पर और कितना हो रहा है।
एक्शन प्लान तैयार, सीवेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का बजट जारी
इन नदियों का एक्शन प्लान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण बोर्ड से भी अनुमोदित हो चुका है। बोर्ड के मुताबिक अधिकतर नदियों में औद्योगिक कचरा, ठोस अपशिष्ट आदि के लिए बजट भी जारी किया गया है।