शासनादेश को दरकिनार कर हरिद्वार और देहरादून में जमे शिक्षकों को अब पहाड़ चढ़ना होगा। अमर उजाला में प्रकाशित खबर का मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने के बाद शासन ने इन शिक्षकों को मूल तैनाती स्थल पर भेजने के आदेश दिए हैं। शिक्षा विभाग इन शिक्षकों को कार्यमुक्त करने की तैयारी में जुट गया है।
उत्तराखंड शासन की ओर से शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने नियमों के विपरीत सुगम में डटे शिक्षकों को कार्यमुक्त किए जाने का आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि तबादला एक्ट की धारा 27 के तहत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित है।
इस समिति की सिफारिश के आधार पर दांपत्य नीति, गंभीर बीमारी, सैनिक पति, विधवा, तलाकशुदा, परिसंपत्ति अधिग्रहण, आपदा के कारण विस्थापित, टिहरी बांध परियोजना के दृष्टिगत टिहरी से विस्थापित एवं पहाड़ से पहाड़ के आधार पर जिन शिक्षकों को संवर्ग परिवर्तन की अनुमति दी गई है, उन शिक्षकों को छोड़कर अन्य शिक्षकों को उनके मूल विद्यालय के लिए कार्यमुक्त किया जाए। शासन के आदेश के बाद अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा वीएस रावत ने भी जिला शिक्षा अधिकारी हरिद्वार को आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
पहाड़ के दूरदराज के स्कूलों से हरिद्वार जिले में सिफारिश लगाकर पहुंचे 82 शिक्षकों में से कुछ हाईकोर्ट के स्टे पर जमे हुए हैं तो कुछ अपनी बीमारी का हवाला देकर यहां कार्यरत हैं। कुछ शिक्षक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश के आधार पर अपना संवर्ग बदलवा चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य शिक्षक कई बार के आदेशों के बावजूद पहाड़ नहीं चढ़े। इसका नुकसान उनके मूल स्कूलों के छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ रहा है। अमर उजाला ने 19 अगस्त के अंक में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
हरिद्वार के सीईओ ने भेजा था प्रस्ताव
हरिद्वार के मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से अगस्त में शिक्षा निदेशालय प्रारंभिक शिक्षा को इन शिक्षकों की तैनाती के संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था। उनका कहना था कि जिला विकास समन्वयक एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में जिले में शिक्षकों की कमी पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की ओर से इन शिक्षकों को हरिद्वार में ही रोकने का प्रस्ताव निदेशालय और सचिवालय को भेजने का निर्देश दिया गया है।
केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर इन शिक्षकों की हरिद्वार में ही तैनाती की शासन से अनुमति ली जाए। बैठक में बताया गया था कि हरिद्वार जिले में सहायक अध्यापक प्राथमिक के 341, प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापक 15, जूनियर हाईस्कूलों के सहायक अध्यापक 97, सहायक अध्यापक एलटी 95, लेक्चरर 75, प्रधानाध्यापक हाईस्कूल 33, प्रिंसिपल इंटर कालेज के 16 पद खाली हैं।
इन शिक्षकों के मामले में कई बार हो चुके आदेश
शासन और शिक्षा निदेशालय की ओर से इन शिक्षकाें को मूल तैनाती स्थल पर भेजने के कई बार आदेश हो चुके हैं। पहला आदेश 19 फरवरी, दूसरा 11 मई और तीसरा आदेश 11 जून को जारी किया गया था।
यह है मामला
प्रदेश में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में 586 शिक्षक नियमों को ताक पर रखकर पहाड़ के विभिन्न जिलों से हरिद्वार, देहरादून सहित कुछ अन्य जिलों के सुगम स्कूलों में पहुंचे थे। इनमें से 253 शिक्षकों को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश पर दिसंबर 2019 में वर्तमान तैनाती स्थल पर ही रोक दिया गया।