ऐसे ही स्थिति 1998 में सूचीबद्ध हुए जितेन्द्र पाल उर्फ जेपी गैंग, जुगल किशोर गैंग, रवि थापा गैंग और गैंगाराम गैंग की है। इन गैंग के छह बदमाशों की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य शांत चल रहे हैं।
देहरादून के विपरीत हरिद्वार में कई ऐसे गैंग एक्टिव हैं, जो यदा-कदा कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं। इनमें सुनील राठी, संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा, नाजिम और प्रवीण वाल्मीकि गैंग का नाम सुर्खियों में है। ये गैंग हरिद्वार से लेकर देहरादून तक अपना नेटवर्क रखते हैं। हरिद्वार में भी बरसों पुराने कई गैंग पुलिस रिकार्ड में चल रहे हैं, लेकिन काफी समय से उनकी गतिविधि भी सामने नहीं आई है।
देहरादून जिले में करीब नौ साल से कोई नया गैंग सूचीबद्ध नहीं हो पाया है। 2010 में जाहिद हुसैन, राम सिंह और मोहम्मद मिंटू के गैंग को सूचीबद्ध किया गया था। इनके बाद से कोई गैंग पुलिस की नजरों में नहीं आया। हालांकि इस अवधि में चेन लूट, चोरी, टप्पेबाजी आदि अपराधों में कई गैंग सामने आए, जिनकी करतूताें की वजह से जन सामान्य में असुरक्षा का माहौल बना।
प्रदेश भर में सूचीबद्ध गैंगाें के सत्यापन का अभियान शुरू किया गया है, ताकि यह साफ हो सके कि कौन-कौन से गैंग सक्रिय हैं और कौन-कौन शांत है। काफी बदमाशों की मौत हो चुकी है। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि लंबे समय से शांत गैंगाें की फाइल बंद करने के साथ नए सक्रिय गैंगाें को सूचीबद्ध किया जाए।
- अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था