ऐसे काम करता है भूकंप अलर्ट एप
भूकंप विशेषज्ञ ग्रीस जोशी के अनुसार, जब भूकंप आता है, तो पी तरंगें और एस तरंगें केंद्र से अलग-अलग दिशाओं में ऊपरी सतह (ग्राउंड लैंडस्केप) की ओर सफर करती हैं। पी तरंग तेजी से यात्रा करती हैं और लैंडस्केप में लगे सेंसर को ट्रिगर करती हैं। सेंसर से डेटा कंट्रोल रूम पहुंचता है और तुरंत एक अलर्ट जारी किया जाता है। इस तरह से उपयोगकर्ता को मोबाइल एप के माध्यम से अलर्ट मिल जाता है। जोशी के अनुसार, पिछले दिनों आए भूकंप में पी तरंगे तेज थीं, लेकिन विनाशकारी नहीं थीं, जबकि एस तरंगे धीमी थीं और अधिकतम नुकसान पहुंचा सकती थीं।
बीते दिनों कुछ मोबाइल में बजी थी अलर्ट बीप
यूएसडीएमए का दावा है कि 12 नवंबर को नेपाल में आए 5.4 मैग्नीट्यूट के भूकंप का उत्तराखंड सहित दिल्ली में कुछ मोबाइलों पर अलर्ट प्राप्त हुआ था। अलर्ट उन्हीं मोबाइल पर प्राप्त हुआ था, जिन्होंने एप को समय-समय पर अपडेट किया था।
राज्यभर में स्थापित सेंसर की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है। एक बार स्थापित होने के बाद भूकंप के झटकों का पता लगाने की दर में सुधार होगा। यह एप संभावित भूकंपों की पूर्व चेतावनी देता है, लेकिन फिलहाल यह पांच मैग्नीट्यूट से अधिक तीव्रता वाले भूकंप की चेतावनी जारी करता है। भविष्य में इसे इस तरह से अपग्रेड किया जाएगा कि बिना एप के भी हर मोबाइल भूकंप आने से कुछ सेंकड पहले चेतावनी जारी करेगा।
- पीयूष रौतेला, कार्यकारी निदेशक, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण