इसके बाद शिमला ही राजधानी रही और हिमाचल में रेलवे लाइनों का जाल बिछाया गया। आजादी के बाद समय समय पर लोगों ने भी रेलवे लाइन बिछाने को लेकर सरकार को ज्ञापन भेजे। 1996 में तत्काल रेल मंत्री सतपाल महाराज, 2004 में रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव तक मांग पहुंचाई गई। वर्तमान में जहां चौखुटिया को रेल लाइन से जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं, वहीं बागेश्वर से भी मांग उठ रही है। यदि अंग्रेज शासनकाल में रानीखेत रेलवे से जुड़ गया होता तो शायद कुमाऊं की यह पहली रेल लाइन होती। संवाद
मैंने रानीखेत के अभ्युदय और विकास विषय को लेकर लंबा रिसर्च किया है। जिसमें रानीखेत का पुरातन इतिहास, अंग्रेजों की खोज, रानीखेत निर्माण एवं विकास, वायसरॉय लार्ड मेयो के जीवन सहित कई विषय शामिल रहे। लार्ड मेयो ने रेल लाइन बिछाने के आदेश तो दिए थे, लेकिन उस वक्त के प्रपत्र उपलब्ध नहीं हो पाए।
-डा. महिराज माहरा, प्राध्यापक, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत।
रानीखेत को रेल लाइन से जोड़ने तथा अंग्रेज शासनकाल में आदेशित रामनगर से रानीखेत तक की सर्वे को शुरू करने की मांग को लेकर 1990 के बाद से ही तमाम रेल मंत्रियों को पत्र भेजकर आग्रह किया गया, लेकिन किसी ने भी इच्छाशक्ति नहीं दिखाई। लार्ड मेयो की असमयिक मौत हो गई, यदि वह जिंदा होते तो रानीखेत में रेल लाइन और राजधानी दोनों विकसित हो जाती।
-मोहन नेगी, पूर्व उपाध्यक्ष, कैंट बोर्ड रानीखेत।