राज्य के किसी हिस्से में दुर्घटना या आपात स्थिति में स्थानीय थाना पुलिस, पटवारी या सरकारी कर्मचारी द्वारा इसकी प्राथमिक सूचना जिलाधिकारी को दी जाती है। ऐसे में जिलाधिकारी तुरंत शासन या मुख्यमंत्री कार्यालय को सूचना प्रेषित करने के साथ हेलीकॉप्टर की मांग करते हैं। इसके बाद शासन स्तर पर इसकी अनुमति प्रदान की जाती है। इसके बाद राज्य सरकार के हेलीकॉप्टर या किराए के हेलीकॉप्टर के द्वारा संबंधित व्यक्ति को एयर लिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया जाता है। लेकिन यह सारी प्रक्रिया विशेष मौकों पर ही अपनाई जाती है। ऐसे में एक आम आदमी को हेली एंबुलेंस का लाभ किस प्रकार मिल पाएगा, इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है।
सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी प्रस्ताव मिलने पर करेंगे विचार
सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी का कहना है कि अटल आयुष्मान योजना में हेली एंबुलेंस सेवा को शामिल करने के लिए एम्स ऋषिकेश का प्रस्ताव मिलने पर इस पर विचार किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन(एनएचएम) में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हेली एंबुलेंस सेवा की सुविधा है। इसके लिए पांच करोड़ बजट की व्यवस्था भी है।
संस्थान में इस सुविधा के शुरू होने से उत्तराखंड में ट्रॉमा पेशेंट के साथ ही ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक, अंग प्रत्यारोपण और मातृ मृत्युदर को कम करने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। यह एक जनहित का मामला है। सरकार यदि इस पर गंभीरता से विचार करती है तो राज्य के गरीब लोगों को भी हेल एंबुलेंस का लाभ मिल सकेगा।
- प्रो. रविकांत, निदेशक, एम्स ऋषिकेश
राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले गंभीर मरीजों को तुरंत स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए इस सेवा से जोड़ने के उद्देश्य से ही हेली एंबुलेंस की परिकल्पना की गई थी। लेकिन यही तभी साकार हो पाएगी, जब सुदूर गांव में रहने वाले अंतिम व्यक्ति को इसका लाभ मिले। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है।
- डॉ. मधुर उनियाल, एम्स के हेली सर्विसेस इंचार्ज और निदेशक एम्स के स्टॉप ऑफिसर