रेलवे ट्रैफिक इंस्पेक्टर एमआर आर्य बताते हैं कि जो भी ट्रेन (रामपुर से काठगोदाम) चलती हैं, उसमें एक सुपरवाइजर तैनात किया गया है। यह सुपरवाइजर लोको पायलेट की मदद करता है। सिग्नल आने की सूचना देने के लिए पटाखों का भी इंतजाम किया गया है।
इसके साथ ही फॉग सेफ्टी डिवाइस भी लगाया गया है, जो लोको पायलेट को आने वाले सिग्नलों की सूचना देता है। ये सभी कदम सुरक्षा के मद्देनजर उठाए गए हैं। वर्तमान में काठगोदाम-हावड़ा, काठगोदाम-दिल्ली-जैसलमेर, नैनी-दून जनशताब्दी और काठगोदाम- दिल्ली शताब्दी स्पेशल ट्रेनों का संचालन हो रहा है।
इंजन में सैंडिंग गियर होता है। इसमें स्थायी तौर पर भी रेत रखी होती है ताकि पहियों के फिसलने का खतरा न हो।
-राजेंद्र सिंह, पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल।