नमामि गंगे परियोजना में गंगा के पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भी गंगा में गंदगी डाले जाने से रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। इसके बाद भी गंगा में पुराने कपड़े, प्लास्टिक, पूजा के फूल एवं अन्य सामग्री, कूड़ा और गंदगी डाली जाती है। हरिद्वार में जनवरी से महाकुंभ भी होना है।
टोटल कोलीफार्म बैक्टीरिया
हरकी पैड़ी पर बैक्टीरिया का स्तर 70 एमपीएन (मोस्ट प्रोबेबिल नंबर) प्रति 100 एमएल मिला है। बालाकुमारी मंदिर के पास यह आंकड़ा 120, बिशनपुर पर 110 और गंगनहर रुड़की से 120 एमपीएन है। स्टैंडर्ड मानक में ए श्रेणी की क्वालिटी में बैक्टीरिया का स्तर प्रति 100 एमएल पानी में 0 से 50 एमपीएन होना चाहिए।
गंगाजल में घुलित ऑक्सीजन और बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड का स्तर सही मिला है, लेकिन टोटल कोलीफार्म बैक्टीरिया अधिक पाए जाने से वाटर क्वालिटी बी श्रेणी की है। रिपोर्ट के अनुसार, यह पानी नहाने के लिए सुरक्षित है। पीसीबी डायरेक्ट सरफेज पानी को बिना क्लोरिनेशन पीने की सलाह नहीं देता है।
-राजेंद्र सिंह कठैत, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी