रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन चंद का कहना है कि नैणी गांव के युवाओं का रुझान खेती बागवानी की ओर है और इस दिशा में वे सफल प्रयास भी कर रहे हैं। ऐसे में यदि सरकार गांव को मॉडल के तौर पर पेश करे, तो पहाड़ के अन्य गांवों को भी नैणी गांव की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है।
केस 1-
नैणी गांव निवासी महावीर चंद ने आठवीं कक्षा तक शिक्षा ली है। उन्होंने गांव में टमाटर एवं फूलों की खेती तथा सेब बागवानी के साथ ही सेब के पौधों की नर्सरी भी तैयार की है। खेती बागवानी से वह साल में करीब 15 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं। इस प्रगतिशील काश्तकार ने वर्ष 1997 में अपने गांव में कीवी फल का बगीचा तैयार किया था। हालांकि उस समय इस फल को बाजार उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने कीवी उत्पादन बंद कर दिया।
केस 2-
इसी गांव के जगमोहन चंद पोस्ट ग्रेजुएट हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी के पीछे दौड़ने के बजाय उन्होंने गांव में ही नकदी फसल उत्पादन शुरू किया। वह साल भर में खेती बागवानी से 4-5 लाख रुपये की आमदनी कर लेते हैं। वर्तमान में वह रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और इसके माध्यम से क्षेत्र में खेती बागवानी को बढ़ावा देने में जुटे हैं।
केस 3-
नैणी गांव निवासी रविंद्र चंद ने खेती बागवानी को आजीविका का जरिया बनाया। नकदी फसल टमाटर उत्पादन और सेब बगीचे के साथ ही वह फूलों की खेती भी कर रहे हैं। इससे उन्हें सालाना करीब पांच लाख रुपये की आय हो जाती है।