जीबी पंत पर्यावरण संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक और इस योजना के मुख्य समन्वयक डॉ. जेसी कुनियाल ने बताया कि पहले चरण में राज्य के सभी 13 जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठकें हो चुकी हैं। दूसरे चरण में एक और बैठक होगी। उसके बाद संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि हर जिले में संबंधित विभागों से प्रस्तावित योजना से जुड़ी सभी तरह की जानकारियां प्राप्त करने के लिए एक फार्मेट (प्रपत्र) तैयार किया जा रहा है। इस योजना के तहत हर तरह के अवशिष्ट के निस्तारण के लिए संबंधित विभाग को जिम्मेदारी दी जाएगी। पूरी कार्ययोजना बनने के बाद इसे सरकार को सौंप दिया जाएगा। संवाद
इन 14 बिंदुओं को आधार पर बनेगा पर्यावरण प्रबंधन का प्लान
नगरों का कूड़ा और अन्य अवशिष्ट का निस्तारण, सॉलिड वेस्ट निस्तारण, बायो मेडिकल अवशिष्ट, इलेक्ट्रानिक वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट, मकानों का मलबा, खनन से निकलने वाले मलबे का निस्तारण, सीवेरज प्रबंधन, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जल स्रोतों के रिचार्ज की योजना, भू जल की स्थिति।
उत्तराखंड शासन के निर्देश पर पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पर्यावरण प्रबंधन तैयार करने का काम शुरू हो चुका है। संस्थान के 10 वैज्ञानिकों की टीम इस काम में जुटी है। एक साल के भीतर प्रशासन के सहयोग से राज्य के सभी 13 जिलों के साथ ही प्रदेश का समग्र प्लान तैयार हो जाने की उम्मीद है।
-डॉ. जेसी कुनियाल, मुख्य अन्वेषक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक जीबी पंत पर्यावरण संस्थान, कटारमल अल्मोड़ा