जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश कुमार मिश्रा कहते हैं कि बेटी को बचाना ही नहीं बल्कि उन्हें पढ़ाना भी है। जमाना पोस्टकार्ड से आई फोन तक पहुंच गया, लेकिन अब भी बालिकाओं के साथ भेदभाव हो रहा है। उनसे पढ़ाई का हक छीना जा रहा है, जो सही नहीं है।
बेटियों को भी पढ़ने का उतना ही अधिकार है, जितना बालकों को है। सर्वे में 400 निरक्षर बालिकाएं सामने आई हैं, जिन्हें पढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है। हमारा प्रयास है कि जिले में कोई भी निरक्षर न रहे।
-डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, जिलाधिकारी