हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद यह करीब-करीब तय हो गया है कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास 16 दिसंबर तक खाली करने होंगे। सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों की ओर से छह माह का समय देने की मांग को ठुकरा दिया।
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इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने पलट कर सरकार से यह भी पूछा कि वह पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवास में रहने का कितना किराया लेगी और उसे किस तरह से वसूल करेगी। अब इस मामले की सुनवाई 21 नवंबर को होगी।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। रुलक (रूरल लिटिगेशन एंड एनटाइटलमेंट केंद्र) ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास और अन्य सुविधाएं दी हैं। इससे सिर्फ सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
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हाईकोर्ट ने आवास के साथ किराया भी लेने को कहा
पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी का सरकारी आवास
- फोटो : AmarUjala
पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास वापस लिया जाए और किराया भी वसूला जाए। सरकार ने कोर्ट को बताया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को 16 दिसंबर तक आवास को खाली करने का नोटिस जारी किया जा चुका है। पूर्व में कोर्ट ने पूछा था कि वे कब तक आवास खाली कर देंगे। पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी का तो कहना था कि वे नवंबर में ही आवास खाली कर देंगे।
सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्रियों ने आवास खाली करने के लिए छह माह का अतिरिक्त समय भी मांगा। पूर्व मुख्यमंत्रियों की इस मांग को हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया।
आवास खाली किए जाने के लिए अतिरिक्त समय की मांग ठुकराए जाने के बाद अब यह तय है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास 16 दिसंबर तक खाली करने होंगे।
अब किराए को लेकर होगी तकरार
रमेश पोखरियाल निशंक का सरकारी आवास
- फोटो : AmarUjala
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तिथि नियत करते हुए सरकार से पूछा है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा प्रयुक्त अवधि के लिए कितना किराया लेगी व उसे किस प्रकार वसूल करेंगी। प्रदेश में इस समय पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा सरकारी आवासों का उपयोग कर रहे हैं।
सरकारी आवास खाली करने के मामले में मात खाने के बाद अब किराए को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसमें सबसे अधिक भार पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी पर पड़ना तय है।
इसका कारण यह है कोश्यारी प्रदेश में नित्यानंद स्वामी के बाद कुछ समय तक मुख्यमंत्री रहे थे और इस हिसाब से सबसे अधिक लंबे समय से इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। चुनौती सरकार के सामने भी है।
सरकार को अब यह तय करना है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों से किराया किस तरह से वसूला जाएगा। सरकार अगर पूर्ण अवधि का किराया वसूलना तय करती है तो पूर्व मुख्यमंत्रियों को खासी बड़े बोझ का सामना करना पड़ सकता है।