IIIजेनेटिक, फास्टिंग, कोलेस्ट्रॉल, पित्त की रुकावट होना है पथरी का कारण
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Iसमय पर ऑपरेशन न होने पर कैंसर, इंफेक्शन और पीलिया होने का खतराI
Iदूनवासियों में पित्त की थैली में पथरी की समस्या बढ़ रही है। यह सिर्फ बड़े, बुजुर्गों में नहीं युवाओं में भी देखने को मिल रही है। डॉक्टर के मुताबिक दून का हर तीसरा व्यक्ति इस समस्या से परेशान है। पित्त की थैली में पथरी से एक फीसदी मरीजों में कैंसर की संभावना भी होती है। ऐसे में डॉक्टर ऑपरेशन करके पित्त की थैली ही निकाल देते हैं।I
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Iदून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व वरिष्ठ सर्जन डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि पित्त की थैली में पथरी होने की वजह जेनेटिक कारण, फास्टिंग, कोलेस्ट्रॉल, पित्त की रुकावट होना या कोई केंद्र बनना आदि हैं। साथ ही उत्तर भारत में पित्त की थैली में पथरी की समस्या कॉमन हो गई है। इसमें ऑपरेशन ही एकमात्र इलाज है। समय पर ऑपरेशन न होने से कैंसर, इंफेक्शन और पीलिया होने का खतरा बढ़ जाता है। ऑपरेशन के दौरान गंभीर स्थिति में आईसीजी (इंडो साइनिंग ग्रीन) तकनीक से उपचार किया जाता है।
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Iदून अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. धनंजय डोभाल ने बताया कि देहरादून के पानी में कैल्शियम की मात्रा अधिक होने की वजह से भी पित्त की थैली में पथरी की समस्या अधिक होती है।I
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Iदर्द होने पर चिपक जाती है थैलीI
Iडॉ. डोभाल ने बताया कि जब मरीज को दर्द होता है तो पित्त की थैली की दीवारों में सूजन आ जाती है और हल्का पानी भी आने लगता है। इससे पित्त की थैली आंतों से चिपकने लगती है। ऐसा होने पर ऑपरेशन में भी समस्या होती है। हम जो तेल या चिकनाई खाते हैं, इसे पचाने के लिए पित्त की थैली की आवश्यकता होती है। जब पित्त की थैली निकल जाती है तो गैस ज्यादा बनने लगती है और पाचन क्रिया प्रभावित हो जाती है।
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Iपित्त की थैली क्यों निकालना जरूरीI
Iश्री महंत इंदिरेश अस्पताल के सर्जन डॉ. आलोक वर्धन माथुर ने बताया कि पित्त की थैली में पथरी लंबे समय तक रहती है तो थैली में सूजन पैदा करती है। इससे थैली सिकुड़ने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है। पित्त की थैली की दीवार की मोटाई एक से दो मिलीमीटर होती है, लेकिन पथरी होने के बाद इसकी मोटाई पांच मिलीमीटर से एक सेंटीमीटर तक हो जाती है। इसलिए पित्त की थैली को निकालना जरूरी होता है।I
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Iपथरी बनने का कारण
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Iडॉ. आलोक ने बताया कि जिस चिकनाई को पित्त में घुला रहना चाहिए, यही जब जमने लगती है तो धीरे-धीरे बालू या कंकड़ के रूप में परिवर्तित हो जाती है। यहीं से पथरी की शुरुआत होती है।I
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Iऑपरेशन का डाटाI
Iडॉ. आलोक वर्धन माथुर ने बताया कि श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में एक महीने में पित्त की थैली के 70 से 75 ऑपरेशन किए जा रहे हैं। वहीं, दून अस्पताल में एक साल में 213 मरीजों की पित्त की थैली के ऑपरेशन किए गए हैं।I