75600 टन कूड़ा निकलता है उत्तराखंड के शहर-गांवों में प्रतिदिन
9150 टन कूड़ा अकेले नगर निकाय क्षेत्र में निकलता है रोजाना
300 ग्राम कूड़ा शहरी क्षेत्र का व्यक्ति जनरेट करता है रोजाना
200 ग्राम कूड़ा ग्रामीण क्षेत्र का व्यक्ति जनरेट करता है रोजाना
50 फीसदी कूडे़ का ही हो पा रहा है उत्तराखंड में निस्तारण
हरिद्वार और ऋषिकेश में फ्लोटिंग पॉपुलेशन की वजह से कूडे़ कचरे की सबसे ज्यादा दिक्कत को देखते हुए इन दो जगहों का खास सर्वे शुरू हो गया है। शहरी विकास विभाग ने एशियन डेवलपमेंट बैंक की सहायता से इस सर्वे को शुरू कराया है। दिसंबर 19 तक इस सर्वे की रिपोर्ट विभाग को मिल जाएगी। इसके बाद, फ्लोटिंग पॉपुलेशन से कूडे़ कचरे की समस्या के निदान के लिए कदम उठाए जाएंगे।
शहरी विकास सचिव शैलेश बगोली के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर ये पाया गया है कि इन दोनों शहरों की जो आबादी है, उससे दस गुना से ज्यादा यहां पर फ्लोटिंग पॉपुलेशन रहती है। इस वजह से कूडे़ कचरे के निस्तारण के प्रयास प्रभावित होते हैं। रोजाना की चुनौती सामने खड़ी होती है। इस समस्या को विभाग प्रमुखता से लेकर इस पर ठोस कार्रवाई करना चाहता है। इसी लिए एडीबी के मार्फत सर्वे का काम शुरू करा दिया गया है।
पिछले महीने एडीबी और उसके स्तर पर अधिकृत संस्था के प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड में आकर सारी स्थिति पर बात की थी और निरीक्षण किया था। सचिव के अनुसार, दिसंबर 19 तक इन दोनों शहरों की रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी। इधर, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि कूडे़ कचरे के निस्तारण के मामले में ऐसा नहीं है कि कोई प्रगति नहीं हो रही। नगर निकायों में कूड़ा प्रबंधन की स्थिति को लगातार सुधारा जा रहा है। चुनौती बड़ी है, लेकिन इस का समाधान निकाल लिया जाएगा।