- उप जिला अस्पताल में नहीं है ब्लड बैंक
- करीब पांच साल पहले बंद हुई ब्लड स्टोरेज यूनिट
उप जिला अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद भी सरकारी अस्पताल में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। 60 हजार की क्षेत्रीय आबादी के बावजूद भी अस्पताल में अब तक ब्लड बैंक नहीं खुल पाया है। तीमारदारों को अपने घायलों, मरीजों और प्रसूताओं के लिए देहरादून से ब्लड यूनिट लानी पड़ती है। अस्पताल में पूर्व में ब्लड स्टोरेज यूनिट संचालित की जाती थी, जो करीब पांच साल से बंद पड़ी है।
विकासनगर और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों से गंभीर घायलों और मरीजों को उपचार के उप जिला अस्पताल में लाया जाता है। अस्पताल में ऑपरेशन, प्रसव और सिजेरियन भी होता है। गंभीर घायलों और मरीजों को तत्काल खून चढ़ाने की जरूरत होती है। वहीं ऑपरेशन और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव की स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए खून की जरूरत होती है, लेकिन उपजिला अस्पताल में ब्लड बैंक ही नहीं है।
करीब पांच साल पहले अस्पताल में ब्लड स्टोरेज यूनिट संचालित की जाती थी, जिसमें विभिन्न ब्लड ग्रुप की पॉजिटिव और निगेटिव यूनिट की दो-दो यूनिट का भंडारण किया जाता था। तब पैथोलॉजिस्ट न होने के चलते ब्लड स्टोरेज यूनिट बंद हो गई थी।
अस्पताल में ब्लड बैंक या स्टोरेज यूनिट न होने के चलते घायल, मरीज और प्रसूता के तीमारदारों को निजी या देहरादून स्थित सरकारी ब्लड बैंक की दौड़ लगानी पड़ती है। गंभीर मरीजों की जान बचाने में समय की अहम भूमिका होती है, लेकिन खून के लिए निजी या देहरादून के सरकारी ब्लड बैंक तक जाने में काफी समय बर्बाद होता है। कई बार घायल और मरीज की जान भी संकट में आ जाती है।
वर्जन
पूर्व में उप जिला अस्पताल में ब्लड स्टोरेज यूनिट संचालित की जाती थी। पैथोलॉजिस्ट न होने के चलते ब्लड स्टोरेज यूनिट बंद हो गई थी। अब पैथोलॉजिस्ट की तैनाती के साथ ब्लड स्टोरेज यूनिट को फिर से शुरू करने की प्रकिया शुरू कर दी गई।
- डॉ. विजय कुमार, प्रभारी, उपजिला अस्पताल