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Iक्राइम लिटरेचर फेस्टिवल: किसे चाहिए सभ्य पुलिस विषय पर हुई चर्चा में बोले पूर्व आईपीएस रायI
आजादी के 75 साल बाद भी आम लोग अपनी ही पुलिस के पास जाने से आज भी डरते हैं। पुलिस सभ्य हो ये सब चाहते हैं, मगर बने कैसे इस पर कभी कोई चर्चा नहीं होती। फाइलों में प्रस्ताव दबकर रह गए। अदालतों के आदेशों को भी हुक्मरानों ने नहीं माना। सच तो ये है कि अंग्रेज बहादुर ने जो पुलिस बनाई थी बस ऐसी ही आज के हुक्मरानों को चाहिए। यह सब चर्चा क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन ''''किसे चाहिए सभ्य पुलिस'''' विषय पर आयोजित सत्र में हुईं। इस पर उपन्यासकार पूर्व आईपीएस विभूतिनारायण राय ने बेबाकी से अपनी बात कही।
फेस्टिवल के दूसरे दिन 18 सत्र हुए। किसे चाहिए सभ्य पुलिस सत्र का संचालन विजय गौड़ ने किया। पूर्व आईपीएस विभूतिनारायण राय ने कहा कि अंग्रेजों ने 1960 में अपने हितों को साधने के लिए पुलिस का गठन किया था। उस वक्त पुलिस ने अंग्रेजों के इशारे भारतीयों की आजादी की लड़ाई को भी कुचलने का प्रयास किया। 87 साल बाद जब आजादी मिली तो अंग्रेजों की पुलिस का भारतीयकरण नहीं हुआ। इसके बाद जो बदलाव हुए वह सुधार की दिशा में नहीं हुए। किसी ने टोपी का रंग बदल दिया तो किसी ने बेल्ट का। मगर पुलिस वही रही। जबकि, इसमें बदलाव की शुरुआत तभी से हो जानी चाहिए थी। पूर्व आईपीएस ने पुलिस सुधार को बनी धर्मवीरा कमेटी का जिक्र किया। कहा, यह आज भी कहीं फाइलों में ही दफन हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी बहुत से आदेश राज्यों को दिए लेकिन उन्हें किसी ने नहीं माना। कहा एक लाख करोड़ रुपये खर्च कर विश्वस्तरीय सड़क तो बन सकती है लेकिन पुलिस और न्यायिक व्यवस्था में सुधार के लिए खर्च नहीं होता।
Iबैंक और टेलीकॉम कंपनी सुरक्षित बनेंगी तभी बचेंगे साइबर क्राइम से: डीजीपीI
डीजीपी अशोक कुमार की पुस्तक साइबर एनकाउंटर पर भी चर्चा हुई। सह लेखक ओपी मिनोचा भी शामिल रहे। सत्र का संचालन डॉ. अनुपमा खन्ना ने किया। डीजीपी ने कहा कि वर्तमान में डीप फेक पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पुलिस तो इसमें काम कर रही है, लेकिन बैंक और टेलीकॉम कंपनी को भी और अधिक सुरक्षित बनना होगा। कहा, साइबर ठग देश के पैसे को क्रिप्टो करेंसी के जरिए विदेशों में भेज रहे हैं। विदेश से अपराधियों को पकड़ने का कोई कारगर नियम कायदे मौजूद नहीं हैं।
Iजिंदगी में धक्काशाही नहीं चलनी चाहिए : ओपी सिंहI
हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह की पुस्तक हौंसलानामा पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि जिंदगी को जीना चाहिए, इसमें धक्काशाही को हावी नहीं होने देना है। किसी को भी अपना बेस्ट वर्जन बनने का अधिकार है। इसलिए वह अपने आप की सुनें। उन्होंने बच्चों की वर्तमान परवरिश और पठन-पाठन के तौर तरीकों पर भी सवाल उठाए। कहा, परीक्षा पास करने वाली पढ़ाई और सरकारी नौकरी पाने की चाहत ने देश का चक्का जाम किया है। बच्चों के पिता और टीचर एक गैंग बन जाते हैं जिसका शिकार उनका बेटा होता है।
Iइन पर भी हुई चर्चाI
पूर्व सीबीआई अफसर नीरज कुमार की पुस्तक सट्टेबाजों की दुनिया के अंदर: मैच फिक्सिंग। उन्होंने क्रिकेट के भीतर भ्रष्टाचार के बारे में बात की। इसमें उन्होंने सीबीआई के उनके कार्यकाल के दौरान 11 जांचों का विवरण किया है।