इन्हीं फार्म के आधार पर कर्मचारियों का वर्षवार विवरण बनाया जाता है। इस तरह ईपीएफओ ने दर्शाया कि कर्मचारियों के पीएफ का विवरण उपलब्ध ही नहीं है। अशोक कुमार ने होटल प्रबंधन से जानकारी ली तो बताया गया कि सभी कर्मचारियों का पीएफ और सभी फार्म समय से जमा किए गए हैं। छह सालों तक अशोक कुमार इधर-उधर भटकता रहा, लेकिन उनकी समस्या का कोई हल नहीं निकला।
इसके बाद परेशान होकर अशोक ने 15 सितंबर 2017 को जिला उपभोक्ता फोरम को इसकी शिकायत की। होटल प्रबंधन ने भी साक्ष्य समेत सभी दस्तावेज फोरम में उपलब्ध करा दिए। इस बीच ईपीएफओ से जो जवाब आए उन्हें फोरम ने निराधार माना।
इस आधार पर उपभोक्ता फोरम ने ईपीएफओ को आदेश दिए हैं कि वह अशोक कुमार का 26 साल का फंड उन्हें उपलब्ध कराए। इसके साथ ही पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और तीन हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी देना होगा।