जल, जंगल, जमीन की चिंता उत्तराखंडवासियों के दिल से जुड़ी है। पर्यावरण दिवस पर अमर उजाला की ओर से आयोजित स्लोगन प्रतियोगिता में यह बात साफ झलकी। हमें उत्तराखंड के हर कोने से दिल छू लेने वाले स्लोगन मिले।
अमर उजाला स्लोगन प्रतियोगिता के तहत हमें करीब 400 स्लोगन मिले। सर्वश्रेष्ठ स्लोगन चुनना कठिन था, लेकिन इनमें से कुछ स्लोगन बिल्कुल अलग थे। आप भी पढ़िए और इनमें झलक रही प्रकृति की चिंता का मनन कीजिए। अमर उजाला सभी विजेताओं को बधाई देता है।
प्रथम स्थान:
- वनों से करो यारी, नहीं आएगी महामारी। - कविता नेगी, विष्णु पुरम, नकरौंदा, देहरादून
द्वितीय स्थान:
- स्वच्छ पानी और शुद्ध हवा, संतुलित जीवन की यही दवा। - प्रियंका पांडेय
- ओ हरियाली, तुम खुशहाली, तुम बिन जीवन खाली। - नंद किशोर, शिक्षक, चौखुटिया, अल्मोड़ा
तृतीय स्थान:
-बरखा की धूम से सजते पहाड़, नदियां की गूंज ले पेड़ों की आड़।
बूटियों में समोकर झरनों का मन, जंगल के प्राण दें सबको जीवन। - डॉ. शालीनी जोशी पंत, पूर्व प्राचार्य, एसएसडीपीसी
- आसमां के बादलों की चित्रकारी, जमी पर मुस्कुराती हुई हरियाली।
मस्तक पर विराजमान पर्वतमाला, कुदरत तेरा हर रंग है निराला। - अंकित कैंतुरा, प्रेमनगर देहरादून
- बनाएं प्रकृति की हर एक कृति, अपनाएं पर्यावरण संस्कृति। -एकेश्वर, आठवीं (स), केंद्रीय विद्यालय, आईएमए, देहरादून