उप जिला अस्पताल की ईएनटी सर्जन 25 दिन के अवकाश पर हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। इन दिनों जुकाम और खांसी के साथ कान, नाक और गले से जुड़ी समस्या के मरीज भी अधिक आ रहे हैं। जनरल ओपीडी में उनका उपचार किया जा रहा है, लेकिन दूरबीन से जांच या सर्जरी की स्थिति में मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है।
उप जिला अस्पताल की ईएनटी की ओपीडी में रोजाना 40 से 45 मरीज उपचार के लिए आते हैं। छह जनवरी से सर्जन डॉ. पल्लवी कठैत अवकाश पर चली गई थीं। उसके बाद से ईएनटी के ओपीडी कक्ष में ताला जड़ा है। जनरल ओपीडी में मरीजों को उपचार मिल रहा है, लेकिन सामान्य लक्षणों वाले मरीजों को ही सुविधा मिल पा रही है। संक्रमण बढ़ने, आराम न होने, दूरबीन से जांच और सर्जरी जैसी स्थिति में विशेषज्ञों के लिए मरीजों को रेफर करना उनकी मजबूरी है।
आसपास के अस्पतालों में ईएनटी सर्जन नहीं हैं, ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में जाना पड़ रहा है, जो उनकी जेब पर भी भारी पड़ रहा है।