जब इतने समय काम करने के बाद वह काबिलियत आ जाएगी तो एआईसीटीई उसका बतौर इंजीनियर प्रमाणन करेगा। उसे अलग से सर्टिफिकेट दिया जाएगा जो कि उसके प्लेसमेंट में काम आएगा।
जिस कॉलेज में जितनी फैकल्टी, उतनी ही सीटें
एआईसीटीई ने इंजीनियरिंग की गिरती साख को बचाने के लिए नया नियम लागू किया है। इसके तहत जिस निजी या सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में जितनी फैकल्टी होगी, उसी अनुपात में सीटें भी दी जाएंगी।
अभी तक कॉलेजों में बड़े पैमाने पर विश्वविद्यालयों की ओर से सीटें बांट दी जाती थी, जो कि नए सत्र से नहीं चलेगा। एआईसीटीई वायस चेयरमैन डॉ. एमपी पुनिया ने बताया कि इस नियम के बाद कई राज्यों के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षकों की स्थायी भर्तियां की जा रही हैं।