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तीन सितंबर तक हटा लो अतिक्रमण चार से देहरादून में चलेगा बुल्डोजर   

Thu, 29 Aug 2019 03:22 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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बुलडोजर से ढहाया अवैध निर्माण - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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देहरादून शहर में सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण और कब्जे हटाने की डेड लाइन तय कर दी गई है। चेतावनी जारी कर दी गई है कि तीन सितंबर तक अवैध कब्जे हटा लें, वरना चार सितंबर से अवैध निर्माण पर बुल्डोजर चलेगा।

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अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) ओम प्रकाश ने दून में फिर से अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाने को लेकर तीन सितंबर को शाम साढ़े पांच बजे एक अहम बैठक बुलाई है। अनुसचिव लोनिवि दिनेश पुनेठा के मुताबिक, यह बैठक सर्वे चौक स्थित महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के आईआरडीटी सभागार में होगी। बैठक में एमडीडीए के उपाध्यक्ष, नगर निगम के नगर आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, लोनिवि, सिंचाई, ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को उपस्थित होने को कहा गया है।

अपर मुख्य सचिव ने अतिक्रमणकारियों से सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की अपील की है। ऐसा न होने पर उन्होंने ताकीद किया है कि टास्क फोर्स ये कब्जे हटाएगी और इसके एवज में भवन स्वामी से खर्च की वसूली होगी। इस अभियान के तहत राजधानी के फ्लाईओवर और रेलवे ओवर ब्रिज के निचले हिस्सों में हो रहे अतिक्रमण को भी हटाया जाएगा। शासन को ऐसी सूचनाएं प्राप्त हुई हैं कि फ्लाईओवर, आरओबी और कुछ प्रमुख पुलों के नीचे भी लोग कब्जे कर रहे हैं। टास्क फोर्स को इन स्थलों की पड़ताल कर अभियान चलाने को कहा जाएगा। 
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कोर्ट में देना है अवमानना का जवाब
सरकार को बीच में रोक दिए गए अतिक्रमण अभियान को लेकर न्यायालय में दाखिल अवमानना याचिका का भी जवाब देना है। इसके लिए सरकार को उच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल करना है। बैठक में अपर मुख्य सचिव अभियान शुरू करने और हलफनामा तैयार करने को लेकर रायशुमारी करेंगे।

मुख्य बिंदु
9000 अतिक्रमण चिन्हित हुए थे सरकारी भूमि पर
5000 अतिक्रमण हटाने का दावा किया था सरकार ने
04 सेक्टरों में शहर को बांटकर चला था अभियान
100 करोड़ रुपये पुनर्निर्माण के लिए आंका गया था

शिकायतों का अंबार
अभियान चलने और उस पर विराम लगने के बाद शासन और प्रशासन के पास शिकायतों का अंबार लग गया था कि कई इलाकों में निशानदेही के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। कुछ इलाकों में अवैध कब्जे होने पर भी अभियान नहीं चला। इसे लेकर एक याचिका प्रवीण ढींगरा ने भी उच्च न्यायालय में एक अवमानना याचिका दाखिल की।

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