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सावधान! कहीं आपके घर और दुकान पर भी तो नहीं है लाल निशान

Fri, 12 May 2017 05:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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क्या आपके घर या दुकान के गेट पर भी लाल न‌िशान लगा है। अगर हां, तो सतर्क हो जाएं। यह न‌िशान आपको परेशानी में डाल सकता है। दरअसल, राजधानी में आइएसबीटी से लेकर घंटाघर तक प्रस्तावित मॉडल रोड के दोनों तरफ अनाधिकृत कब्जों को दो दिवसीय अभियान चलाकर चिन्हित कर लिया गया है।
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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विनीत कुमार के मुताबिक घंटाघर से लेकर टर्नर रोड तक 374 छोटे बड़े अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट  का कहना है कि कब्जेदारों को नोटिस जारी की जा रही है।

नोटिस का जवाब नहीे देने वाले कब्जेदारों के खिलाफ तोडफोड़ की कार्रवाई शुरू की जाएगी। उल्लेखनीय है कि आइएसबीटी से लेकर घंटाघर तक की सड़क को मॉडल रोड के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
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शहरी विकास मंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण में अस्थायी अतिक्रमण को तो हटा दिया गया लेकिन अब बारी स्थायी अतिक्रमण को लेकर है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विनीत कुमार की अगुवाई में पीडब्ल्यूडी, राष्ट्रीय राजमार्ग और नगर निगम के अफसरों की संयुक्त टीम ने दो दिवसीय विशेष जांच अभियान चलाकर सड़क के दोनों ककिनारों पर किए गए अनाधिकृत निर्माणों को चिन्हित किया।
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374 जगहों पर कब्जा कर बनाए पक्के निर्माण

​ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विनीत कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान कुल 374 जगहों पर कब्जा कर पक्के निर्माण कर लिए गए हैं। कब्जेदारों ने नाले नालियों को पाटने के साथ ही राजमार्ग की जमीन पर दुकानें और आवासीय निर्माण कर लिया है।   लेकिन अब इन्हें तोड़ा जाएगा। कब्जेदारों को नोटिस जारी की जा रही है ताकि वे दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रख सकें। ऐसा नही करने वाले कब्जेदारों के निर्माण को अभियान चलाकर तोड़ा जाएगा। बहरहाल ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की इस कार्रवाई से कब्जेदारों में हड़कंप मच गया है। कई कब्जेदारों ने पक्के निर्माणों को बचाने के लिए जुगत लगाना भी शुरू कर दिया है।
  कब्जेदारों ने राजनीतिक आकाओं की भी शरण लेनी शुरू कर दी है। वहीं ज्चाइंट मजिस्ट्रेट का कहना है कि अनाधिकृत कब्जे हर हाल में हटाए जाएंगेे, इसमें किसी भी प्रकार की कोताही नही बरती जाएगी।  
  दूसरी ओर इतनी अधिक जगहों पर अतिक्रमण को लेकर तमाम विभागों के अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल उठता है कि इतनी अधिक संख्या में कब्जेदारों ने जमीनें कब्जा कर पक्के निर्माण कर लिए और संबंधित विभागों के अफसरों को इसकी भनक तक नही लगी। ऐसे में अफसरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में हैं। 
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