उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों के टाइगर रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्रों में हाथियों की संख्या बढ़ने के साथ ही मानव और हाथियों के बीच संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मानव-हाथी संघर्ष में हर साल जहां 500 से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी, वहीं इस संघर्ष में हर साल करीब 100 हाथियों की भी मौत हो रही है।
मानव-हाथी संघर्ष रोकने को लेकर केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से प्रोजेक्ट एलीफेंट जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी शुरू की गईं, जिससे सकारात्मक परिणाम भी आ रहे हैं। इसी बीच भारतीय वन्यजीव संस्थान के वन्यजीव विज्ञानियों की ओर से किए गए शोध में सामने आया कि उत्तराखंड में जहां मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बेहद कम हैं और हाथी बहुत अधिक हमलावर नहीं है, वहीं ओडिशा में हाथी बहुत अधिक हमलावर हो रहे हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से दोनों राज्यों में हाथियों को लेकर किए गए शोध में यह बात सामने आई कि उत्तराखंड में जहां एक साल के भीतर हाथियों के हमले में सिर्फ 10 लोगों की मौतें हुई, वहीं ओडिशा में हाथियों के हमलों में 130 लोगों को जान गंवानी पड़ी।
यह स्थिति तब है, जबकि दोनों राज्यों में जंगलों में हाथियों की संख्या दो हजार के आसपास है। विज्ञानियों ने शोध में पाया कि उत्तराखंड में राजाजी टाइगर रिजर्व, जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के साथ ही जंगलों में खाने पीने की व्यवस्था और समृद्ध हैबीटेट होने से हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं कम हो रहीं, जो सुकून देने वाली बात है, जबकि ओडिशा में हाथियों को वन क्षेत्रों में खाने पीने की चीजें उत्तराखंड की तुलना में कम मिल रहीं, जिससे भोजन की तलाश में हाथी जंगलों से निकलकर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं, जहां इंसानों के साथ उनका संघर्ष हो रहा है। इंसानों के साथ ही हाथियों को भी अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
कॉरिडोर गुम होने से भी घटनाओं में इजाफा
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मी नारायणन की मानें तो पिछले कई दशकों में देश के तमाम टाइगर रिजर्व और वन क्षेत्रों में हाथियों के कॉरिडोर या तो पूरी तरह खत्म हो गए या सिकुड़ने का सिलसिला जारी है। जंगलों से निकलकर हाथी अपने कॉरिडोर से आवाजाही करते हैं, लेकिन ज्यादातर कॉरिडोर के आसपास घनी बस्तियां बसने से हाथियों का सामना इंसानों से हो रहा, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं हो रही हैं।
उत्तराखंड में हाथियों की संख्या 2026
केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड में हाथियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। साल 2017 में कराई गई गणना में जहां हाथियों की संख्या 1,839 थी, वहीं 2020 की गणना में हाथियों की संख्या बढ़कर 2,026 हो गई है। जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व में जहां 1,224 हाथी हैं, वहीं राजाजी टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या 311 है। वन्यजीव विज्ञानियों की मानें तो उत्तराखंड में हाथियों के लिए व्यवस्थित प्राकृतिक पर्यावास और भोजन की पर्याप्त व्यवस्था होने से हाथियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।
उत्तराखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई कि ओडिशा की तुलना में उत्तराखंड के हाथी कम हमलावर हैं। इसकी मुख्य वजह हाथियों के लिए पर्याप्त प्राकृतिक पर्यावास और भोजन की पर्याप्त उपलब्धता है, जबकि ओडिशा में हाथियों के आवास में कमी और पर्याप्त भोजन न से हाथी आबादी क्षेत्रों में दाखिल हो रहे हैं।