देहरादून/कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज के स्टोर रूम से हाथी का दांत गायब हो गया है। अभिलेखों में दर्ज और मौके पर उपलब्ध हाथी दांतों का मिलान नहीं होने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लैंसडौन वन प्रभाग का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे कालागढ़ टाइगर रिजर्व (केटीआर) वन प्रभाग के डीएफओ तरुण एस. ने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ लालढांग रेंज में डेरा डाल दिया है। संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी और चेकिंग के साथ ही विभागीय कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
दरअसल, करीब एक महीने पहले प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल ने सभी वन प्रभागों को पत्र भेजकर वन क्षेत्रों में बरामद और प्राकृतिक रूप से टूटे मिले हाथी दांतों का सत्यापन करने के निर्देश दिए थे, कई रेंजों में हाथी के दांत बहुत वर्षों से रखे हुए हैं। पत्र में कहा गया था कि अलग-अलग स्थानों पर रखे गए हाथी दांतों का एक जगह अभिलेखीय मिलान किया जाए और इसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। इसी क्रम में लालढांग रेंज के स्टॉक की जांच की गई। इस दौरान अभिलेखों में दर्ज और मौके पर उपलब्ध दांतों का मिलान नहीं हो पाया। इसके बाद से विभाग में खलबली मची हुई है। अधिकारी और कर्मचारी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच में जुट गए हैं। एक संभावना व्यक्त की जा रही है कि कुछ दिन पहले स्टोर को बदला गया है, ऐसे में सामान को शिफ्ट करने के दौरान कहीं हाथी दांत किसी दूसरी जगह पर रख दिया गया हो, पर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। कितने हाथी दांत गायब हैं, उनका वजन कितना है, इन सवालों का जवाब नहीं मिल पाया है। मामले में अधिकारी जांच होने और उसके बाद स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कोई बात कहने की बात कह रहे हैं।
-
क्या कहते हैं अधिकारी
मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल धीरज पांडे ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। वन संरक्षक राजीव धीमान ने कहा कि जांच पूरी होने और स्थिति स्पष्ट होने के बाद कुछ कहा जा सकता है। डीएफओ तरुण एस. ने बताया कि हाल ही में लालढांग रेंज में स्टोर रूम को दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया गया था, इस दौरान कुछ सामान भी शिफ्ट किया गया था। फिलहाल स्टोर रूम और रेंज कार्यालय की सघन जांच की जा रही है।