उत्तराखंड के जंगलों में तीन साल में 238 हाथी बढ़ गए हैं। हाथियों की संख्या में यह 15 फीसदी का इजाफा है।
अगर हाथियों की आबादी की तुलना वर्ष 2007 से की जाए तो हाथियों की संख्या में 33 फीसदी इजाफा हुआ है। हाथियों की गणना में पाया गया कि इनमें टस्कर (दांत वाला हाथी) की संख्या सबसे अधिक है।
अगर लिंगानुपात के लिहाज से देखा जाए तो उत्तराखंड में नर-मादा का अनुपात विश्व स्तरीय मानक से बेहतर है। एक नर पर तीन मादाओं का वैश्विक मानक है और उत्तराखंड में एक नर पर ढाई मादा का अनुपात आ रहा है। टस्कर के अवैध शिकार के कारण विश्व के कई देशों में एक नर हाथी पर सौ मादाओं तक का अनुपात आता है।
वन विभाग ने प्रदेश में जंगली हाथियों की गणना 4 और 5 जून को कराई थी। वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने बताया कि टस्करों की संख्या अधिक होने से स्पष्ट है कि प्रदेश में हाथियों के अवैध शिकार पर प्रभावी अंकुश लगा है।
साथ ही नर-मादा अनुपात भी उत्साह जनक है। प्रदेश में बिना दांत वाले मखना हाथी भी हैं लेकिन इनकी संख्या कम है। उन्होंने बताया कि गणना में वन विभाग ने कार्बेट टाइगर रिजर्व, राजाजी राष्ट्रीय पार्क, शिवालिक, कुमाऊं और भगीरती वृत्तों के क्षेत्रीय वन प्रभागों के 66443.5 वर्ग किमी में हाथियों की गणना कराई थी।
वन मंत्री ने बताया कि गणना की इकाई वन बीट मानी गई। हाथी की उम्र, वर्ग, लिंग, झुंड रचना, टस्कर की पहचान, चलने की दिशा का पता किया गया। जीपीएस की भी मदद ली गई। हाथियों की एक चौथाई आबादी की उम्र पांच वर्ष से कम है। प्रदेश में कुल 1797 हाथी पाए गए।
सबसे अधिक 1035 हाथी कार्बेट टाइगर रिजर्व में पाए गए। यहां हाथियों का सबसे बड़ा वास स्थल है। इस रिजर्व की ढिकाला रेंज में 242 और सर्पदूल्ली रेंज में 160 हाथी देखे गए। राजाजी पार्क में 309 और लैंसडोन वन प्रभाग में 160 हाथी देखे गए हैं। यमुना से शारदा नदी के बीच सभी वन प्रभागों में हाथी पाए गए।
हाथियों की संख्या की स्थिति
वर्ष 2001-1507 हाथी
वर्ष 2003-1582 हाथी
वर्ष 2005-1510 हाथी
वर्ष 2007-1346 हाथी
वर्ष 2012-1559 हाथी
वर्ष 2015-1797 हाथी