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Uttarakhand: फोन से संपर्क साध दिमाग की विद्युत चुंबकीय तरंगे ट्यूमर को दे रहीं जन्म, इन बातों का रखें ध्यान

Tue, 09 Jun 2026 12:25 PM IST
Renu Saklani अंकित यादव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

ब्रेन ट्यूमर शुरुआत के पहले और दूसरे स्टेज में खुलकर सामने नहीं आता है। बाद में इसका ऑपरेशन करना थोड़ा जटिल हो जाता है। 20 वर्ष के युवाओं से लेकर 60-70 वर्ष के बुजुर्गों तक ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ा है।

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ब्रेन ट्यूमर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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फोन और दिमाग से निकलने वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें एक-दूसरे के संपर्क में आकर ब्रेन ट्यूमर बनाने वाली एस्ट्रोसाइट्स कोशिकाओं की संख्या को कई गुना बढ़ा रहीं हैं। इससे ब्रेन ट्यूमर की चपेट में आने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि इसमें युवा बड़ी संख्या में शामिल हैं। इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए लोगों को आवश्यक एहतियात बरतना होगा।

विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्रेन ट्यूमर के मरीजों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। आमतौर पर यह शुरुआत के पहले और दूसरे स्टेज में खुलकर सामने नहीं आता है। बाद में इसका ऑपरेशन करना थोड़ा जटिल हो जाता है। 20 वर्ष के युवाओं से लेकर 60-70 वर्ष के बुजुर्गों तक ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ा है।

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हर सप्ताह पांच से छह मरीजों का किया जाता ऑपरेशन
श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. पंकज अरोड़ा के मुताबिक, उनके पास हर महीने करीब 20 नए मरीज ऐसे आते हैं जिनमें ब्रेन ट्यूमर की पहचान की जाती है। यह संख्या सामान्य से काफी ज्यादा है। करीब पांच वर्ष पूर्व उनके पास इसके आधे मरीज ही आते थे। हर सप्ताह पांच से छह मरीजों का ऑपरेशन भी किया जाता है।

चिकित्सक के अनुसार वैसे तो इसके पीछे कई कारण हैं लेकिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दिमाग की नजदीकी भी ब्रेन ट्यूमर बनने की मुख्य वजह है। दरअसल, फोन को जब हम कान में लगाते हैं तो इससे निकलने वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें कान के रास्ते दिमाग तक संपर्क साधकर दिमाग से निकलने वाली विद्युत चुंबकीय तरंगों के पास तक पहुंच जाती हैं। इससे दिमाग में एस्ट्रोसाइट्स कोशिकाओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है जो ब्रेन ट्यूमर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

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दौरे को सिर्फ दौरा न समझें

डॉ. अरोड़ा बताते हैं कि दौरा ब्रेन ट्यूमर का शुरुआती लक्षण होता है। इसके अलावा इसकी चपेट में आए व्यक्ति का शरीर कमजोर हो जाता है। सिर में दर्द के साथ ही कानों में झनझनाहट भी देखने को मिलती है। इन सभी लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। चिकित्सक ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रेन में पनप रही हर गांठ कैंसर युक्त गांठ नहीं होती है।

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इन बातों का रखना होगा ध्यान

-अधिक समय तक मोबाइल फोन पर बात न करें

-किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाकर रखें

-धूम्रपान न करें

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