-199 करोड़ रुपये का नुकसान केंद्र सरकार के उपक्रम टीएचडीसी, एसजेवीएनएल, एनटीपीसी, एनएचपीसी के विद्युत गृहों से उत्पादित बिजली की दरों में वृद्धि से हुआ।
-46 करोड़ रुपये का नुकसान उत्तराखंड जल विद्युत निगम की परियोजनाओं में उत्पादन की कमी के कारण हुआ।
-110 करोड़ रुपये का नुकसान केंद्रीय उपक्रमों के विद्युत उत्पादन में कमी के चलते बाजार से महंगी बिजली खरीदने से
- 75 करोड़ रुपये का घाटा पावर ग्रिड के ट्रांसमिशन की दरों में हुई वृद्धि से हुआ। ये दरें विद्युत नियामक आयोग ने बढ़ाई।
-195 करोड़ रुपये का पूर्व वर्षों में अधिक अनुमन्य धनराशि के समायोजन से हो रहा है।
-40 करोड़ रुपये का सालाना नुकसान राज्य पुनर्गठन के दौरान परिसंपत्तियों के कम आकलन से हो रहा है
यूपीसीएल के वित्तीय प्रबंधन के लपेटे में अब ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों के 7700 कर्मचारी भी आ जाएंगे। इन सभी कार्मिकों की बिजली दरों में वृद्धि होगी और इसकी सीमा भी तय की जाएगी। यह निर्णय लेने से पहले निगम प्रबंधन तीनों निगमों के अधिकारियों और कर्मचारियों को भरोसे में लेगा।
विद्युत नियामक आयोग में 30 नवंबर तक हम याचिका दायर करेंगे। इस याचिका में निगम बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव करेगा। हमें पूरा भरोसा है कि निगम की बैलेंस शीट में जो घाटा दिखाई दे रहा है, उसके बड़े हिस्से की भरपाई आयोग कर देगा। लेकिन उसके बाद भी जो वित्तीय नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए विद्युत दरों में वृद्धि किया जाना आवश्यक है।
- बीसीके मिश्रा, प्रबंध निदेशक, यूपीसीएल