उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। चुनावी साल होने के कारण उन्हें बिजली का झटका नहीं लगने जा रहा है।
ऊर्जा निगम ने वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए एग्रीगेट रेवन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) राज्य विद्युत नियामक आयोग में जमा कर दिया है, जिसमें महज 15 फीसदी विद्युत दर बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
था 65 फीसदी से अधिक दरें बढ़ाने का प्रस्ताव
पिछले साल ऊर्जा निगम ने 65 फीसदी से अधिक बिजली की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव किया था। नियामक आयोग ने निगम प्रबंधन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। तब आयोग की ओर से महज सात फीसदी ही बिजली दर बढ़ोत्तरी की स्वीकृति दी गई थी।
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ऊर्जा निगम के नए प्रबंधन ने इस बार चौंकाने वाला कदम उठाया है। पहली बार तय समय सीमा 30 नवंबर 2013 के भीतर ही एआरआर जमा कर दी गई।
साथ ही कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के अनुसार बिजली की दरें बढ़ाने की सिफारिश की गई है। ऊर्जा निगम ने घाटा पूरा करने के लिए उपभोक्ताओं से वसूली करने का निर्णय लिया है।
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ऊर्जा निगम ने वास्तविक खर्चे के अनुसार ही बिजली की दरें बढ़ाने की सिफारिश की है जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर भार न पड़े। कई राउंड की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।
- एसएस यादव, प्रबंध निदेशक ऊर्जा निगम
ऊर्जा निगम की ओर से जमा किए गए एआरआर की जांच की जा रही है। जांच करने के बाद ही इस पर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया दी जा सकती है। इससे पहले कुछ भी कहना संभव नहीं है।
- जगमोहन लाल, अध्यक्ष उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग