पूंजीगत लागत में बढ़ोतरी का ये प्रस्ताव
प्रोजेक्ट साइज- 2018 में पूंजीगत लागत- पूंजीगत लागत की नई दरें
छोटे हाइड्रो प्लांट 05 मेगावाट तक(रुपये प्रति मेगावाट)- 10 करोड़ - 11.50 करोड़
छोटे हाइड्रो प्लांट 5-15 मेगावाट तक(रुपये प्रति मेगावाट)-9.50 करोड़- 11.25 करोड़
छोटे हाइड्रो प्लांट 15-25 मेगावाट तक(रुपये प्रति मेगावाट)- 9 करोड़- 11 करोड़
सोलर पीवी पावर प्रोजेक्ट(रुपये प्रति मेगावाट)- 3.88 करोड़- 3.60 करोड़
प्रोजेक्टों की आयु में ये होगा बदलाव
प्रोजेक्ट श्रेणी- पूर्व में आयु- अब आयु
विंड एनर्जी प्रोजेक्ट- 25-25
बायोमास पावर प्रोजेक्ट, आरडीएफ प्रोजेक्ट- 20-25
जीवाश्म ईंधन आधारित प्रोजेक्ट-20-25
छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट- 35- 40
बायोमास गैसिफायर आधारित प्रोजेक्ट- 20- 25
बायोगैस आधारित पावर प्रोजेक्ट- 20- 25
(आयु वर्ष में है। सोलर पीवी प्लांट की आयु पूर्व की भांति 25 वर्ष ही है।)
उपभोक्ता मांग सकेंगे ग्रीन एनर्जी
नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से पैदा होने वाली बिजली के लिए उपभोक्ता सीधे यूपीसीएल से ग्रीन एनर्जी की मांग कर सकेंगे। पर्यावरण संरक्षण के तहत ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने ये प्रावधान किए हैं। इसके तहत इंडस्ट्री मालिक, होटल मालिक जैसे अधिक बिजली खपत वाले उपभोक्ता यूपीसीएल से 25 से 100 प्रतिशत तक ग्रीन एनर्जी की मांग कर सकते हैं। यूपीसीएल को सभी माध्यमों से ये बिजली उपलब्ध करानी होगी।
नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से बिजली खरीद की बाध्यता
आयोग ने वायु ऊर्जा प्रोजेक्ट, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से हर साल यूपीसीएल के लिए निश्चित प्रतिशत में बिजली खरीद की अनिवार्यता की है। 2023-24 में हाइड्रो से कुल बिजली खपत का 0.66 प्रतिशत, अगले साल 1.08, 2025-26 में 1.80 प्रतिशत बिजली यूपीसीएल को खरीदनी होगी। इसी प्रकार, विंड एनर्जी से भी बिजली खरीद के लिए प्रतिशत तय किया गया है। वहीं, अन्य माध्यमों जैसे गैस आधारित या कोयला आधारित पावर प्रोजेक्ट से बिजली खरीद की भी प्रतिशत तय की गई है।
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पूर्व का अधिनियम 2018 से 2023 तक था। अब नए प्रावधानों के साथ अधिनियम का ड्राफ्ट जारी किया है, जिस पर दो जून तक सुझाव ई-मेल या डाक के माध्यम से भेज सकते हैं। 13 जून को सुबह 11 बजे आयोग कार्यालय में जनसुनवाई होगी। इसके बाद अधिनियम की अधिसूचना जारी होगी। -नीरज सती, सचिव, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग