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विद्युत संशोधन बिल पारित करने की हुई कोशिश तो 25 लाख कर्मचारी करेंगे हड़ताल

Sun, 21 Jan 2018 07:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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strike - फोटो : demo pic
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केंद्र सरकार ने अगर बजट सत्र के दौरान विद्युत (संशोधन) बिल-2014 को पारित करने की कोशिश की तो देशभर के 25 लाख कर्मचारी इसके विरोध में एक दिन की हड़ताल करेंगे। इससे पहले बजट सत्र के दौरान ही पूरे देश के ऊर्जा कर्मी संसद पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।

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हड़ताल और धरना-प्रदर्शन की तारीख का एलान ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों और इंजीनियरों की नेशनल को-आर्डिनेशन कमेटी करेगी। इस बात का एलान ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने किया।

वह शनिवार को यमुना कॉलोनी स्थित ऑफिसर्स क्लब में नॉर्थ इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के महासम्मेलन को संबोधित रहे थे। उन्होंने कहा कि इस बिल के पास होने से विद्युत वितरण करने वाली कंपनियों के  अधिकार सीमित हो जाएंगे।
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बिजली महंगी हो जाएगी, जिसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा

बिजली - फोटो : FILE PHOTO
बिजली के खंभे से उपभोक्ताओं को कनेक्शन देने का अधिकार निजी कंपनियों को दे दिया जाएगा। निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए संसद के आगामी बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार इस एक्ट को पास कराने पर आमादा है।

दुबे ने कहा कि इससे बिजली महंगी हो जाएगी, जिसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। बिल के पारित होने की स्थिति में जनता के पैसे से बने बिजली नेटवर्क के सहारे निजी कंपनियां करोड़ों का मुनाफा कमाएंगी। उन्होंने कहा कि विद्युत (संशोधन) बिल-2003 बनाते समय बिजली बोर्डों का घाटा 30 हजार रुपये के स्तर पर था जो अब बढ़कर 4.14 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

बिजली बोर्डों पर 5.22 लाख करोड़ की देनदारी भी बकाया है। उन्होंने कहा कि देश में विद्युतीकरण से शेष बचे चार करोड़ परिवारों तक बिजली पहुंचाने का काम केवल सरकारी कंपनियां ही कर सकती हैं। कहा कि उत्तराखंड के ऊर्जा कर्मियों को पे-मैट्रिक्स और एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रमोशन) का लाभ मिलना चाहिए।
 
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गैस परियोजनाओं के नाम पर हुआ है घोटाला

trivendra singh rawat
इसे लेकर सरकार के साथ जो समझौता हुआ है, उसका पालन होना चाहिए। दुबे ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी पत्र भेजा है।
इस मौके पर एआईपीईएफ के मुख्य संरक्षक पदमजीत सिंह, राजस्थान विद्युत अभियंता संघ के जीएस भदौरिया, पंजाब विद्युत अभियंता संघ के संजीव सूद, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के केडी बंसल, उत्तर प्रदेश विद्युत अभियंता संघ के राजीव सिंह, उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन (यूपीईए) के एमसी गुप्ता, यूपीईए के महासचिव अनिल मिश्रा, कार्तिकेय दुबे, जेसी पंत, प्रदीप कंसल, एपी अमोली, अशोक टंडन, इंसारुल हक, नत्थू सिंह रवि, सुनील मोगा, एमएल नौटियाल, विनोद कवि, राकेश शर्मा, केहर सिंह और दीपक बेनीवाल सहित कई अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

गैस परियोजनाओं के नाम पर हुआ है घोटाला
देहरादून। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि उत्तराखंड में गैस परियोजनाओं के नाम पर घोटाला हुआ है। यह डीआरई की रिपोर्ट है कि निजी कंपनियां ओवर इंवाइसिंग कर रही हैं। इस रिपोर्ट पर केंद्र सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।

क्या है विद्युत संशोधन बिल-2014 में
विद्युत संशोधन बिल में यह प्रावधान किया गया है कि ऊर्जा के क्षेत्र में अब तीन के बदले चार कंपनियां कार्य करेंगी। बिजली के खंभे से उपभोक्ताओं को कनेक्शन देने का काम नई कंपनी करेगी। इस बात का एलान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था कि बिजली के उपभोक्ता अपनी पसंदीदा कंपनी से कनेक्शन ले सकेंगे। विद्युत कर्मी इसका विरोध इस वजह से कर रहे हैं कि इससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
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