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उत्तराखंड में ‘बिजली वाली ट्रेन’ को भी झटका, यात्रियों को उठानी पड़ सकती है परेशानी

Sun, 23 Apr 2017 11:30 AM IST
मनीष चंद्र भट्ट/अमर उजाला, देहरादून
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दून स्टेशन पर चल रहे मरम्मत कार्य की वजह से इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन को भी झटका लगा है। फिलहाल देहरादून से सिर्फ एक इलेक्ट्रिक ट्रेन का संचालन हो रहा है। इससे ट्रेनों के संचालन पर लगने वाली कुल लागत बढ़ रही है। वहीं, पर्यावरण को नुकसान भी स्वाभाविक है।
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दून रेलवे स्टेशन से वर्तमान में छह ट्रेनों का इलेक्ट्रिक इंजन के सहारे संचालन हो रहा था। इनमें शताब्दी एक्सप्रेस, जन शताब्दी एक्सप्रेस, बांद्रा एक्सप्रेस, कोच्चुवेली एक्सप्रेस, उपासना एक्सप्रेस और नंदा देवी एक्सप्रेस शामिल हैं।

लेकिन 17 अप्रैल से इन ट्रेनों को फिर डीजल इंजन से चलाया जा रहा है। क्योंकि, अभी रेलवे ने एक, दो और तीन नंबर प्लेटफार्म का ही समुचित विद्युतीकरण किया है। लिहाजा मरम्मत कार्य के चलते इलेक्ट्रिक ट्रेनों का शेड्यूल भी गड़बड़ा गया है।
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इलेक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेनों को कई बार चार नंबर प्लेटफार्म भी लेना पड़ रहा था। इस वजह से रेलवे ने फिलहाल बांद्रा एक्सप्रेस को छोड़कर बाकी ट्रेनों को डीजल इंजन से ही चलाने का निर्णय लिया है।
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इलेक्ट्रिक ट्रेन के ये भी फायदे

स्टेशन अधीक्षक करतार सिंह ने बताया कि अभी चार नंबर प्लेटफार्म का विद्युतीकरण नहीं हुआ है। ऐसे में सभी ट्रेनों का संचालन इलेक्ट्रिक के बजाय डीजल इंजन से किया जा रहा है। मरम्मत कार्य पूरा होते ही तय ट्रेनों का इलेक्ट्रिक इंजन से संचालन शुरू कर दिया जाएगा।


- डीजल इंजन के बजाय इलेक्ट्रिक ट्रेन वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। 

- दून से संचालित सभी ट्रेनें डीजल इंजन से चलने पर सालाना लगभग दो करोड़ रुपये का खर्च  आता था। जबकि, सभी ट्रेनें बिजली से चलने पर लगभग 20 लाख रुपये सालाना खर्च होंगे। 

 -इलेक्ट्रिक इंजन में गियर बदलने पर ट्रेन में यात्रियों को ज्यादा झटके नहीं लगते हैं। 
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