टिहरी संसदीय सीट के जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बिल्कुल अलग है।
भाजपा की हर बार असफल कोशिश
यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ है जिसे भेदने की भाजपा हर बार असफल कोशिश करती है। यहां मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच नहीं मंत्री प्रीतम सिंह का भाजपा नेता मुन्ना सिंह चौहान के बीच होता रहा है।
मोदी लहर कालसी से त्यूनी और कुवाऊं से लाखामंडल की तरफ बढ़ते कमजोर पड़ने लगती है। जनजातीय होने का फक्र महसूस करने वाला मतदाता भले उसके फायदों से आज भी अंजान है।
लेकिन स्वर्गीय विधायक गुलाब सिंह की देन को कोई नहीं भूला है। मंत्री प्रीतम सिंह पिता की राजनीतिक विरासत को बढ़ा रहे हैं, लेकिन मोदी की लहर पर सवार भाजपा की पतवार अगर मुन्ना सिंह चौहान मजबूती से संभालते हैं तो इस बार कांग्रेस को यहां से हमेशा मिलने वाली विशाल बढ़त कम होगी।
चकराता विधानसभा क्षेत्र में विकास, बेरोजगारी, मंहगाई जैसे मुद्दे गौण हैं। यहां विकास की परिभाषा दूसरे क्षेत्रों से अलग दिखती है।
गांव को जोड़ने वाली सड़क कच्ची
नकदी फसलों की भारी पैदावार वाले इस समृद्ध क्षेत्र में आज भी दशकों पहले मिला जनजातीय दर्जा भुनाया जाता है। यहां विकास कुछ ऐसा है कि हर खेत के साथ पक्की पानी की गुल पहुंची है पर गांव को जोड़ने वाली सड़क कच्ची है।
घरों तक बिजली पानी का कनेक्शन तो है लेकिन स्कूल में मास्टर और अस्पताल में डाक्टर न के बराबर हैं। यहां जनजातीय होने का मतलब शायद वहीं चंद लोग समझते हैं जिन्हें इसका लाभ सिविल सर्विसेज से लेकर सरकारी नौकरी पाने में मदद मिली।
लाखामंडल के एक गांव कंड़ी के बोगलु आज भी जनजातीय क्षेत्र का दर्जा मिलने को सबसे बढ़ा एहसान मानते हैं, लेकिन वह यह नहीं जानते की उसके फायदे क्या हैं। उनके लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं में मिलने वाली रियायत ही सबकुछ है।
उनके चार बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन वह कहते हैं कि इंटर पास कर लें तो काफी है। बोगलु नहीं जानते कि एसटी का आरक्षण उनके बच्चों को आईएएस, डाक्टर, इंजीनियर बना सकता है।
अशिक्षा इस क्षेत्र का सबसे बढ़ा अभिशाप
राजनीति का ऐसा तानाबाना इस क्षेत्र में बुना गया है कि लोग जनजातीय होने का फर्क सीने से लगाए घूम रहे हैं जबकि उसका फायदा चंद लोग ही उठा पाए।
मियोंडा गांव के युवा अजब सिंह चौहान का कहना है कि अशिक्षा इस क्षेत्र का सबसे बढ़ा अभिशाप है। क्षेत्र में ऐसे संसाधन विकसित ही नहीं किये गए कि लोग शिक्षित हो सकें।
इसी क्षेत्र के किशन सिंह चौहान का कहना है कि ऐसा नहीं है कि कांग्रेस एक ही मुद्दे पर वोट लेती रहेगी। युवा संभावनाएं तलाश रहे हैं।
लाखामंडल कस्बे के बहादुर सिंह राणा का कहना है कि क्षेत्र में अज्ञानता इस कदर हावी है कि लोग अपने अधिकार नहीं जानते। पढ़ा लिखा तबका मुन्ना चौहान को मानता है, लेकिन उनका बार बार पार्टी बदलना मतदाता के विश्वास का तोड़ता है।
यहां 8 वर्ष से इंटर कालेज खुला है, लेकिन उसमें साइंस के मास्टर नहीं हैं। गौसा पुल की बुजुर्ग महिला वामो देवी का कहना है कि जहां उसका बेटा कहेगा वहीं वोट करेगी।
बदहाल सड़कों से नहीं किसी को सरोकार
चकराता से त्यूनी और लाखामंडल जाने वाले दोनों सड़क मार्ग बदहाल हैं। सड़क पर चलते हुए लगता है मानों जमाने पहले इन्हें पक्का किया गया होगा। सड़क को विकास से जोड़ते हुए जब स्थानीय लोगों से पूछा तो उन्होंने इसे मुद्दा नहीं माना।
लोगों का कहना है कि सड़क को बन जाएगी। लावड़ी गांव के पास खेत से लौट रहे बुजुर्ग हीरा सिंह ने कहा कि हमने तो जमाने से ऐसी सड़क देखी है।
समय समय पर इसका रखरखाव होता है लेकिन बर्फवारी सब खराब कर देती है इसमें सरकार क्या कर सकती है। वहीं नीचले इलाके सैया में बीएस रावत और प्रेम सिंह मानते हैं कि त्यूनी में कई बार सड़क हादसों में जानें जा चुकी हैं।
टमाटर की खेती से प्रचार पर असर
इस समय जौनसार भाबर के एक बड़े क्षेत्र में टमाटर की बुआई के बाद गुढ़ाई और बेलों को बांधने का समय चल रहा है। गांव के लोग अपने खेतों में जुटे हैं, जिससे प्रचार बेहद फीका है।
चकराता के पास एक गांव थाना के किसान माया राम जोशी ने बताया कि नकदी फसलें आय का बढ़ा साधन हैं। जनजातीय क्षेत्र होने के बावजूद लोग खेतीबाड़ी को सर्वाधिक जोर देते हैं।
कांग्रेस को सर्वाधिक उम्मीद इसी गढ़ से
चकराता विधानसभा कांग्रेस का गढ़ है जहां से साकेत बहुगुणा 2012 को टिहरी उपचुनाव में नौ हजार मतों का बढ़त लेने में कामयाब रहे।
यह बढ़त कांग्रेस के पास 2004 और 2009 में भी रही। इससे पहले भी इस क्षेत्र में वोट कांग्रेस को मिला जिसे अगर किसी ने चुनौती दी तो मुन्ना सिंह चौहान ने, हालांकि वह गढ़ को भेद नहीं पाए।
साकेत बहुगुणा को इस बार भी उम्मीद है कि यहां से सर्वाधिक बढ़त रहेगी।