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इस मुद्दे से बदल सकते थे हरीश रावत चुनावी समीकरण, क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र लेंगे फैसला

Thu, 07 Dec 2017 10:12 AM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, भराड़ीसैंण
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Harish Rawat and trivendra singh rawat
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पिछली सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार इस मुद्दे से चुनावी समीकरण को बदल सकते थे। माना जा रहा था कि विस चुनाव से ऐन पहले बड़ा दांव चलकर चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर देंगे, लेकिन वह फैसला लेने का साहस नहीं जुटा पाए।  तो क्या अब त्रिवेंद्र  सरकार इस पर फैसला ले पाएगी....
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विधानसभा सत्र करने गैरसैंण (भराड़ीसैंण) पहुंची सरकार से पहाड़ के जनमानस को बहुत उम्मीदें हैं। गैरसैंण राज्य के उस पर्वतीय भूभाग का प्रतीक है, जो भौगोलिक कठिनाइयों के साथ बुनियादी जरूरतों के अभाव से जूझ रहा है।

जब-जब सरकार यहां पहुंचती है तो पहाड़ के जनमानस के मन में उस बड़े फैसले की आस जागती है, जो राजधानी से जुड़ा है। हर बार की तरह इस बार सियासी हवाओं में यह सवाल तैर रहा है कि क्या इस बार गैरसैंण का भाग्य तय हो जाएगा।
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पिछली सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार जब भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र करने पहुंची थी, तब भी गैरसैंण के लोगों को सरकार से बड़े फैसले की उम्मीद थी। माना जा रहा था कि विधानसभा चुनाव से ऐन पहले हरीश रावत राजधानी का बड़ा दांव चलकर चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर देंगे।

लेकिन सत्र के समापन के बाद गैरसैंण के चेहरे पर मायूसी थी, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री फैसला लेने का साहस नहीं कर सके।अब प्रश्न यही है कि क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत गैरसैंण की इस मायूसी को तोड़ेंगे? सत्ता की कमान संभालने के बाद त्रिवेंद्र ने गैरसैंण पर बड़ा फैसला लेने के संकेत दिए थे।
 
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राजधानी की यह पहेली उतनी सरल नहीं, जितनी चुनावी वायदों में है दिखाई देती

trivendra singh rawat
गैरसैंण को  ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का भाजपा का चुनावी वादा भी है। मगर सियासी जानकारों की मानें तो राजधानी की यह पहेली उतनी सरल नहीं है, जितनी चुनावी वायदों में दिखाई देती है।

यही वजह है कि सरकारें मंत्रियों, विधायकों और नौकरशाहों का कारवां लेकर गैरसैंण पहुंचती जरूर हैं, लेकिन राजधानी के सवाल पर उनके कदम ठिठक जाते हैं। गैरसैंण को उन वादों के हल भी चाहिएं जो पिछली सरकार ने किए थे।

ये वादे गैरसैंण और उसके आसपास के गांवों को सड़कों से जोड़ने, पेयजल योजना का निर्माण करने और स्वास्थ्य, शिक्षा और नागरिक सुविधाओं से जुड़े हैं, जिन्हें लेकर स्थानीय जनमानस की उम्मीदें सरकार के पहुंचने के साथ जाग उठी हैं।
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