पिछली सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार इस मुद्दे से चुनावी समीकरण को बदल सकते थे। माना जा रहा था कि विस चुनाव से ऐन पहले बड़ा दांव चलकर चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर देंगे, लेकिन वह फैसला लेने का साहस नहीं जुटा पाए। तो क्या अब त्रिवेंद्र सरकार इस पर फैसला ले पाएगी....
विधानसभा सत्र करने गैरसैंण (भराड़ीसैंण) पहुंची सरकार से पहाड़ के जनमानस को बहुत उम्मीदें हैं। गैरसैंण राज्य के उस पर्वतीय भूभाग का प्रतीक है, जो भौगोलिक कठिनाइयों के साथ बुनियादी जरूरतों के अभाव से जूझ रहा है।
जब-जब सरकार यहां पहुंचती है तो पहाड़ के जनमानस के मन में उस बड़े फैसले की आस जागती है, जो राजधानी से जुड़ा है। हर बार की तरह इस बार सियासी हवाओं में यह सवाल तैर रहा है कि क्या इस बार गैरसैंण का भाग्य तय हो जाएगा।
पिछली सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार जब भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र करने पहुंची थी, तब भी गैरसैंण के लोगों को सरकार से बड़े फैसले की उम्मीद थी। माना जा रहा था कि विधानसभा चुनाव से ऐन पहले हरीश रावत राजधानी का बड़ा दांव चलकर चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर देंगे।
लेकिन सत्र के समापन के बाद गैरसैंण के चेहरे पर मायूसी थी, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री फैसला लेने का साहस नहीं कर सके।अब प्रश्न यही है कि क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत गैरसैंण की इस मायूसी को तोड़ेंगे? सत्ता की कमान संभालने के बाद त्रिवेंद्र ने गैरसैंण पर बड़ा फैसला लेने के संकेत दिए थे।