सालों से अध्यक्ष बनने के लिए उपाध्यक्षी का बोझ झेल रहे कांग्रेसी नेता का मन फिर उदास हो गया है। अब महानगर अध्यक्षी की गणित चल रही है तो उनका नाम कोई ले ही नहीं रहा।
पार्टी का कोई ऐसा वरिष्ठ नेता नहीं है जिनकी उन्होंने चरण वंदना नहीं की। लेकिन मामला ढाक के तीन पात है। नेताओं के पास अध्यक्षी की दावेदारी के लिए गए तो बोले-उपाध्यक्षी अभी और करो। एक्सपीरियंस आता है। इस पर उनका मन खट्टा हो गया।
बैठकर जोड़ गांठ कर रहे हैं कि अगर नेतागीरी न करते तो बिजनेस में कितना काम लिए होते।