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नियम उल्लंघन पर निर्वाचन आयोग ने विधायकों पर कसा शिंकजा

Tue, 10 Jan 2017 10:52 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : demo pic
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आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में निर्वाचन आयोग ने तीन विधायकों और एक पूर्व विधायक को नोटिस जारी किया है।
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आयोग ने शासन को ताकीद किया है कि वह वाहनों पर लालबत्ती व हूटर के इस्तेमाल को तत्काल प्रभाव से रोके। बाहरी राज्यों से राज्य की सीमा में दाखिल होने वाले महानुभावों के वाहनों से लालबत्ती और हूटर तत्काल उतरवाए जाने के निर्देश भी दिए गए।

इस संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने सोमवार को सचिवालय में शासन के अधिकारियों की बैठक ली जिसमें उन्होंने आचार संहिता से संबंधित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने की अपेक्षा की। राज्य सचिवालय में पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि गत चार जनवरी से अब तक 2495 लीटर शराब और 6.44 किग्रा चरस पकड़ी जा चुकी है। 
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पुरोला में 84 हजार रुपये भी जब्त किए गए हैं। 29 अवैध हथियारों को पकड़ा गया है। उन्होंने कहा कि गंगोत्री के विधायक विजय पाल सिंह सजवाण को नोटिस भेजा गया है। उन्हें सोशल मीडिया पर बगैर अनुमति विज्ञापन जारी करने के एवज में नोटिस भेजा गया है।

हरिद्वार ग्रामीण के विधायक स्वामी यतीश्वरानंद को नगर पालिका हाल में बैठक करने के आरोप में नोटिस दिया गया है। पुरोला के पूर्व विधायक राजकुमार को भी नोटिस भेजा है। उन पर सरकार डाक बंगले में बैठक करने का आरोप है। उन्होंने कहा कि लालबत्ती और हूटर पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए कि बाहरी राज्यों से लालबत्ती व हूटर तत्काल हटाए जाएं और इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाने में दी जाए।

विधायक हरबंस कपूर को नोटिस
विधायक हरबंस कपूर को जिला निर्वाचन अधिकारी रविनाथ रमन की ओर से सोमवार को नोटिस जारी किया गया है। हरबंस कपूर बिना परमिशन के व्हाट्स ऐप और फेसबुक पर चुनाव प्रचार कर रहे थे। उनकी ओर से चुनाव प्रचार संबंधी कई तरह के संदेश भेजे जा रहे थे। जैसे ही जिला निर्वाचन अधिकारी को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत विधायक को नोटिस भेजा। साथ ही बिना अनुमति किसी भी प्रकार का चुनाव प्रचार नहीं करने को कहा गया। वहीं, विधायक हरबंस कपूर का कहना है कि जिस तरह से जनता का साथ भाजपा को मिल रहा है। उसके लिए कार्यकर्ताओं को बधाई संदेश दिया गया, जिसे आचार संहिता का उल्लंघन मान लिया गया है। उन्होंने कहा कि नोटिस मिल गया है और इसका जवाब मंगलवार को दिया जाएगा। 

अफसरों को दिशा-निर्देश
आचार संहिता को लेकर जारी दिशा-निर्देशों की अनुपालना के संबंध में मुख्य सचिव एस. रामास्वामी की अध्यक्षता में भी एक बैठक हुई। इस बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने सभी अधिकारियों को आयोग के दिशा-निर्देशों के बारे में जानकारी दी। राज्य सम्पत्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि मंत्रियों व महानुभावों के  वाहनों से लाल बत्तियों को तत्काल हटाया जाए। इस बात का ध्यान रखा जाए कि वे राजकीय वाहनों का उपयोग केवल शासकीय कार्य एवं राजकीय आवास से राजकीय कार्यालय तक ही प्रयोग करें। राजकीय अतिथि गृहों के इस्तेमाल में भेदभाव न हो। एक व्यक्ति को 48 घंटे से अधिक के लिए आवंटित न हो। सार्वजनिक दरें वसूली जाएं। रिहायशी बस्तियों में अतिक्रमण हटाए जाने के कार्य से लोगों का विस्थापन होता हो तो इसे तुरंत रोक दिया जाए क्योंकि इससे वोटरों का मतदान का अधिकार प्रभावित होता है। उन्होंने विभागों में किसी भी प्रकार का स्थानान्तरण न करने व उसे निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति तक कार्यमुक्त न करने के निर्देश दिए। 

चुनाव डयूटी से छूट नहीं
मुख्य सचिव ने  वन, वित्त एवं अन्य कई विभागों द्वारा निर्वाचन ड्यूटी से छूट की मांग को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि संबंधित जिलाधिकारी द्वारा निर्वाचन ड्यूटी से संबंधित अंतिम फैसला लिया जाएगा। किसी भी विभाग को पूर्ण रूप से निर्वाचन ड्यूटी में छूट नहीं प्रदान की जाएगी। सांसद एवं विधायक निधि से कोई नया फंड अवमुक्त जारी नहीं होगा।नये कार्य स्वीकृति व नई निविदाओं पर रोक रहेगी। 15 फरवरी तक किसी भी प्रकार के विज्ञापन प्रसारित नहीं होगा। बेहद जरूरी विज्ञापन भी केवल सूचनात्मक हों। यदि पैरोल के किसी प्रकरण पर निर्णय लेना आवश्यक होगा तो उसे निर्वाचन कार्यालय को संदर्भित करना होगा। ऊर्जा विभाग सहित अन्य विभागों के अधीन निगमों में प्रबंध निदेशक आदि पदों को भरने की कार्यवाही पर रोक रहेगी। यदि कोई प्रक्रिया चल रही हो तो उसका परिणाम निर्वाचन के बाद घोषित होगा। शिक्षा सहित सभी विभागों अवकाश पर गए कार्मिकों का अवकाश निरस्त कर उन्हें मुख्यालय वापस बुलाएं ताकि उनकी निर्वाचन ट्रेनिंग कराई जा सके।
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फाइल नहीं संदर्भ भेजें
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विभागीय सचिवों को कहा कि उन्हें सभी फाइलें भेजने की आवश्यकता नहीं है। फाइलें मुख्य सचिव को भेजें और आयोग को इनका संदर्भ अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। विधानसभा द्वारा पारित हो चुके बजट से संबंधित फाइलें निर्वाचन कार्यालय को किसी पूर्वानुमति के लिये भेजने की आवश्यकता नहीं है। कहा कि यदि निर्माणकारी संस्था अथवा ठेकेदारों द्वारा कार्य पूर्ण कर लिया गया हो तो उनको भुगतान किया जा सकता है।
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